
आचार्य कालूगणी
जीवन-वृत्त
- 1909–1936
जीवन-झांकी
- छापर (राजस्थान), फाल्गुन शुक्ला 2
- मूलचंदजी कोठारी
- छोगांजी
- बीदासर (राजस्थान), आश्विन शुक्ला 3
- लाडनूं (राजस्थान), भाद्रपद पूर्णिमा
- गंगापुर (राजस्थान), भाद्रपद शुक्ला 6
चातुर्मास · 27
- Sardarsahar
- Bidasar
- Churu
- Ladnun
- Sujangarh
- Udaipur
- Jodhpur
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- Gangapur
तीर्थ स्थल
- स्मारक
आचार्य श्री कालूगणी तेरापंथ के अष्टम आचार्य थे। विक्रम संवत् 1966 में बीदासर में आचार्य डालगणी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया। उनका जन्म 15 फरवरी 1877, शुक्रवार को राजस्थान के छापर में हुआ।
पिता का नाम श्री मूलचन्दजी चोपड़ा और माता का नाम श्रीमती चोगाजी था। उनके जन्म के समय चतुर्थ आचार्य जयाचार्य और युवाचार्य मघराज छापर से बारह किलोमीटर दूर बीदासर में विराजमान थे। बीदासर के श्री नागराजजी बेंगानी को किसी महान् आत्मा के अवतरण का आभास हुआ और उन्होंने आचार्य के प्रवचन के समय घोषणा की कि समीप ही किसी का जन्म हुआ है जो आगे चलकर तेरापंथ का प्रभावशाली आचार्य बनेगा।
एक वर्ष की अवस्था में ही उनके पिता का देहावसान हो गया। इस अप्रत्याशित घटना ने परिवार को सदा के लिए बदल दिया और पूरा परिवार संघ के निकट आ गया। दस वर्ष की अवस्था में, 20 सितम्बर 1887, बुधवार को, उन्होंने अपनी माता श्रीमती चोगाजी और बहन श्रीमती कानकंवरजी के साथ बीदासर में पंचम आचार्य मघराजजी से दीक्षा ग्रहण की।