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आचार्य महाश्रमण
11 / 11 · आचार्य

आचार्य महाश्रमण

2010-Present

जीवन-वृत्त

आचार्य-काल
2010 से वर्तमान

जीवन-झांकी

जन्म
सरदारशहर (राजस्थान), वैशाख शुक्ला 9सं. 2019
पिता
झूमरमलजी दूगड़
माता
नेमादेवी
दीक्षा
सरदारशहर (राज.), वैशाख शुक्ला 14 — आचार्यश्री तुलसी की आज्ञा से, मुनि सुमेरमलजी 'लाडनूं' के द्वारासं. 2031
महाश्रमण पद
लाडनूं (राजस्थान), भाद्रपद शुक्ला 9सं. 2046
युवाचार्य पद
गंगाशहर (राजस्थान), भाद्रपद शुक्ला 12 (14-09-1997) — आचार्यश्री महाप्रज्ञजी द्वारासं. 2054
आचार्य पद
सरदारशहर (राजस्थान), वैशाख शुक्ला 9 (23 मई 2010)सं. 2067

चातुर्मास · 16

  1. 2068 · 2011Kelwa
  2. 2069 · 2012Jasol
  3. 2070 · 2013Ladnun
  4. 2071 · 2014Delhi
  5. 2072 · 2015Biratnagar
  6. 2073 · 2016Guwahati
  7. 2074 · 2017Kolkata (Rajarhat)
  8. 2075 · 2018Chennai
  9. 2076 · 2019Bangalore
  10. 2077 · 2020Hyderabad
  11. 2078 · 2021Bhilwara
  12. 2079 · 2022Chhapar
  13. 2080 · 2023Mumbai
  14. 2081 · 2024Surat
  15. 2082 · 2025Ahmedabad
  16. 2083 · 2026Ladnun

शान्ति में तेजस्विता, मौन में तीक्ष्णता, ज्ञान में विनम्रता और सरलता में विशिष्टता — यह आचार्य महाश्रमण का संक्षिप्त परिचय है। पहले वे मुनि मुदित के नाम से जाने जाते थे। उनमें असाधारण प्रतिभा तथा सूक्ष्म अन्तर्दृष्टि है।

अत्यन्त मृदुता और पूर्ण समर्पण उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ हैं। अपने असाधारण गुणों के कारण मुनि मुदित ने तेरापंथ के अनेक वरिष्ठ साधुओं का नेतृत्व किया और अट्ठाईस वर्ष की अवस्था में 'महाश्रमण' बने। व्यापक वैज्ञानिक और विवेकसम्मत दृष्टि उनकी विशेषता है।

1997 में, पैंतीस वर्ष की अवस्था में, वे युवाचार्य — आचार्य पद के उत्तराधिकारी — घोषित हुए, जो आचार्य के बाद संघ का सर्वोच्च पद है। 2010 में वे तेरापंथ के एकादश आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए। उनका जन्म 1962 में राजस्थान के सरदारशहर में हुआ।

बारह वर्ष की अवस्था में उन्होंने दीक्षा ली। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ के कुशल मार्गदर्शन में उन्होंने शिक्षा पाई और निष्ठावान शिष्य सिद्ध हुए। वे विद्वान्, लेखक, प्रभावशाली वक्ता और ध्यान-साधक हैं, और तेरापंथ के युवा संगठनों को नैतिक तथा भावनात्मक मार्गदर्शन देते हैं।