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श्लोक 11

11

दृष्ट्वा भवन्तमनिमेष-विलोकनीयं नान्यत्र तोषमुपयाति जनस्य चक्षुः । पीत्वा पयः शशिकर-द्युति-दुग्ध-सिन्धोः क्षारं जलं जलनिधेरसितुं क इच्छेत् ॥११॥


अनिमेष दृष्टि से देखने योग्य आपको देखकर मनुष्य के नेत्र अन्यत्र सन्तोष नहीं पाते। चन्द्र-किरण के समान कान्ति वाले क्षीर-सागर का जल पीकर कौन समुद्र का खारा जल पीना चाहेगा?

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