मुख्य सामग्री पर जाएँ

श्लोक 34

34

श्च्योतन्-मदाविल-विलोल-कपोल-मूल- मत्त-भ्रमद्-भ्रमर-नाद-विवृद्ध-कोपम् । ऐरावताभमिभमुद्धतमापतन्तं दृष्ट्वा भयं भवति नो भवदाश्रितानाम् ॥३८॥


मद से मलिन, चंचल कपोल-मूल वाले, मत्त भ्रमरों के नाद से बढ़े हुए क्रोध वाले, ऐरावत के समान उद्धत सामने आते हुए हाथी को देखकर भी आपके आश्रितों को भय नहीं होता।

ऑडियो नहीं है