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श्लोक 35

भिन्नेभ-कुम्भ-गलदुज्ज्वल-शोणिताक्त- मुक्ताफल-प्रकर-भूषितभूमिभागः। बद्धक्रमः क्रमगतं हरिणाधिपोऽपि नाक्रामति क्रमयुगाचलसंश्रितं ते॥35॥


फाड़े हुए हाथी के कुम्भ-स्थल से गिरते उज्ज्वल रक्त से सने मोतियों के समूह से भूमि-भाग को विभूषित करने वाला सिंह भी, पैर बढ़ाकर भी, आपके चरण-युगल रूपी अचल का आश्रय लेने वाले पर आक्रमण नहीं करता।

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