मुख्य सामग्री पर जाएँ

श्लोक 38

वल्गत्तुरंग-गजगर्जित-भीमनाद- माजौ बलं बलवतामपि भूपतीनाम्। उद्यद्दिवाकरमयूख-शिखापविद्धं त्वत्कीर्तनात् तम इवाशु भिदामुपैति॥38॥


उछलते घोड़ों और गजों की गर्जना के भीम नाद वाली रण-भूमि में बलवान् राजाओं की सेना भी आपके कीर्तन से शीघ्र भेद को प्राप्त होती है — जैसे उदित होते सूर्य की किरण-शिखाओं से बिंधा हुआ अन्धकार।

सुनें