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श्लोक 40

अम्भोनिधौ क्षुभितभीषणनक्रचक्र- पाठीन-पीठभयदोल्वणवाडवाग्नौ। रंगत्तरंग-शिखरस्थित-यानपात्रा- स्त्रासं विहाय भवतः स्मरणाद् व्रजन्ति॥40॥


क्षुभित भीषण मगरमच्छों के समूह तथा पाठीन-पीठ मत्स्यों से भयदायक, प्रचण्ड वडवाग्नि वाले समुद्र में, उछलती तरंगों के शिखर पर स्थित जहाज़ वाले लोग आपके स्मरण से भय छोड़कर पार चले जाते हैं।

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