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म्हारै सांस-सांस में

नन्दन वदनाजी रा झेलो म्हारा वन्दन तुलसी

Nandan Vadnaji Ra Jhelo Mhara Vandan Tulsi

साध्वी सिद्धप्रज्ञाजी · म्हारै सांस-सांस में

Record no.3004

नन्दन वदनाजी रा झेलो म्हारा वन्दन तुलसी — Lyrics

नन्दन वदनाजी रा झेलो, म्हारा वन्दन तुलसी। म्हारै रोम-रोम में पुलकन, अभिनव अनुपम तुलसी।।

आस्था रा म्हे दिवला जोया, भावां रा शुभ साखिया। हो थांरी पदरज शीश चढावां, मोद मनावां तुलसी।।

कालजयी आलेख बण्या है, पौरुष पुण्य प्रताप स्यूं। हो थांरै निर्मल यश री फैली, पावन परिमल तुलसी।।

नभ री उपमा नभ ही होवै, सागर उपमा सागर है। हो तुलसी री उपमा स्यूं उपमित, अनुपम केवल तुलसी।।

पुण्याई पुरजोर थांरी, रसमय पोर-पोर है। हो म्हारै कालजै री कोर, नूंई भोर तुलसी।।

म्हारै मन मंदिर में आओ, देव! पधारो तुलसी। हो पल-पल ध्यावां थांरो ध्यान, पार उतारो तुलसी।।

  1. 1.Nandan Vadnaji Ra Jhelo Mhaara Vandan Tulsi
  2. 2.यह भावपूर्ण भक्ति गीत साध्वी सिद्धप्रज्ञाजी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य तुलसी के प्रति गहन श्रद्धा, प्रेम और आत्मिक समर्पण की अभिव्यक्ति की गई है। गीत में उनके पवित्र व्यक्तित्व, अद्वितीय यश, पुण्य और प्रेरणादायी जीवन का सुंदर वर्णन मिलता है। रचनाकार ने आचार्य तुलसी को आस्था, आनंद और आध्यात्मिक जागरण का स्रोत मानते हुए उनके चरणों में अपनी भक्ति अर्पित की है।

Roman Transliteration

nandan vadnaji ra jhelo, mhara vandan tulsi. mharai rom-rom men pulakan, abhinav anupam tulsi..

astha ra mhe divla joya, bhavan ra shubh sakhiya. ho thanri padaraj shish chadhavan, mod manavan tulsi..

kalajyi alekh banya hai, paurush punya pratap syun. ho thanrai nirmal yash ri phaili, pavan parimal tulsi..

nabh ri upama nabh hi hovai, sagar upama sagar hai. ho Tulsi ri upama syun upamit, anupam keval tulsi..

punyai purjor thanri, rasamay por-por hai. ho mharai kaljai ri kor, nuni bhor tulsi..

mharai man mandir men ao, Dev! padharo tulsi. ho pal-pal dhyavan thanro dhyan, par utaro tulsi..

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