गीतिका संग्रह — पृष्ठ 2
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- मननशील मानव! कर ले, स्वाध्याय सुंधा का पान।
- महिमा सामायिक की गाई, प्रभु महावीर ने,
- ऊं ह्रीं श्रीं नमो अरहंत,
- रसना को जो नर वश म करता,
- मधुरभाणी मानव का बढ़ता मोल है।
- ध्यान के अभ्यास से जीवन बदलता है।
- ज्ञान है स्वभाव, शेष चेतना के विभाव,
- साधना करस्यां आपां मिल प्रेक्षा-ध्यान री।
- महापर्व सम्वत्सरी, लाया नयी बहार।
- आत्म मन्दिर में क्षमा का, दीप फिर से जगमगाए।
- सारी दुनियां में न्यारा, मैत्री का पर्व मनाएं,
- सोच जरा इन्सान, मिला मानव जीवन वरदान।
- हे प्रज्ञा के दीप जले, समता की राह चलें।
- अर्हं अर्हं का ध्यान लगाऊं।
- मन री गांठां खोल, कि मंजिल मिल ज्यासी।
- बन्धुओ! मन के महल में, दीप उजलाओ।
- अपनी आदतों को पहले तुझे सुधारना है।
- इन्सां! तू बदल खुद को, बदलेगा जमाना रे।
- करें इस चंचल मन को शान्त
- सूरज का उगना याद रहा, पर दिन का ढलना भूल गए।
- मनवा! जागो रे, अपना जन्म सुधारों रे।
- हम क्षण-क्षण का उपयोग करैं।
- रे चेतन! हुआ सवेरा, अब तो आंखें खोल जरा रे,
- पायो पूनम रै चांदड़लै-सो ओ नर जीवन अनमोल
- मैं तने पूछूं रे चेतनियां! प्यार स्यूं।
- नया सवेरा आया, नई रोशनी लाया।
- जाग चेतन! जाग तेरा बाग, आग में क्यों पल-पल झुलसे।
- आंख उपघारो-उघारो-उघारो अब तो नींद निवारो,
- कितना भीतर में अज्ञान,
- जीता है इस युग में, हर मानव डरा-डरा।
- राही! जगने की कर ले तैयारी।
- हो मनवा! चेतना रे दर्पण नैं तूं उजलो राखीजे।
- जिन्दगानी मुश्किलों का नाम है,
- हे...भक्ति में लीन रहें, शक्ति का स्रोत बहे।
- किसी को जीतना है तो, हृदय के प्यार से जीतो।
- जैन धर्म के हीरे मोती हम दिखलाएं गली गली
- जागो नींद त्यागो, सीख सुन सन्तों की,
- जले धर्म की जोत, करें उद्योत, समय अनुकूल है,
- कल्पवृक्ष धरती के जंगम, तारण-तरण जहाज।
- आया है सन्त गांव में, भगती रो गहरो रंग लगा लै।
- मंजिल चरण पखारै है, कुदरत काम संवारे है।
- जन-जन का कल्याण, नव-जनिर्माण, लक्ष्य महानू रे,
- सत्य अहिंसा, शान्ति का पाठ पढ़ाए,
- श्रमणोपासक की चर्या का हमको पालन करना है।
- धर्म हमारा प्राय, जगत का उजियारा।
- जैन जीवन शैली श्रावको! अपनाओ
- जागो! जागो! अब श्रावक-श्राविकाओ!
- आध्यात्मिक वैज्ञानिक व्यक्तित्वों का हो निर्माण,
- हमारा प्यारा हिन्दुस्तान।
- लोकपुरुष की ज्योतिर्मय यात्रा का जो पावन रथ है,
- सब धर्मों का सार, शान्ति का द्वार, ज्योति की धार है,
- अणुव्रत का उजाला फैले देश भर में,
- हम गीत एकता के गाएं।।
- सत्य सादगी का जीवन जीना है।
- जाग अरे इन्सान-३ तू है आनन्द समन्दर।
- जीवन के मरु-मग में सुन्दर बाग लगाएगे,
- आयो चौमासो, लिया उजासो, लहरै धर्म समन्दरियो।
- हो भायां (बायां) तपस्या री तैयारी करल्यो अवसर आयो है।
- करें आयम्बिल तप उपधान।
- म्हे तपोयोग री अमर कहाणी युग-युग तक दुहरावां।