गीतिका संग्रह — पृष्ठ 3
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- तापसी रे आंगणियै देवदार लहरावे। तपसण रै...
- सावणियो ओ रिमझिम बरसै ओ रिमझिम बरसै,
- तप स्यूं आतमा रो उद्धार, ओ है सब धर्मा रो सार।
- तप को वन्दन करते हैं, अनुमोदन करते हैं,
- तप अन्तर री ज्योत है, जो अक्षय शक्ति स्रोत है
- तप रै झूलै में झूल्यां आनन्द आवै है।
- ॐ ऋषभाय नम: ॐ
- ॐ जय कालू – जन-मन का मानस गाए
- ॐ जय तुलसी
- ॐ जय तुलसी गुरुराज
- ॐ जय त्रिशलानन्दन! स्वामी जय त्रिशलानन्दन!
- ॐ जय महाप्रज्ञ
- ॐ जय महाप्रज्ञ गुरुदेव।
- ॐ जय वर्धमान भगवान।
- ॐ भिक्षु ॐ भिक्षु जपो सदा
- ॐ भिक्षु जपे
- ॐ भिक्षु जय
- ॐ भिक्षु धुन
- ॐ भिक्षु! आरती उतारें ॐ जय भिक्षु!
- अंतर की शुद्धि
- अंतर भावों में
- अंधियारो चिहुं ओर हो, फैलायो धरम प्रकाश,
- अक्षय अमर विभव है
- अक्षय तृतीया
- अक्षय तृतीया
- अगर तुम चाहते हो
- अचानक छोड़ गये
- अच्छा बच्चा उसे कहें हम।
- अच्छे मानव कहलायेंगें
- अजपा जप यह दिन-रात चले,
- अजब गजब की मस्ती
- अजब शान हैं
- अज्ञान का तिमिर
- अणुव्रत
- अणुव्रत का नया स्वर
- अणुव्रत को फैलाएं हम
- अणुव्रत गीत (1)
- अणुव्रत गीत (2)
- अणुव्रत दीप
- अणुव्रत सूर्य उगाया है।
- अणुव्रत है सोया
- अणुव्रत—दिवस
- अत्याचारों का राज
- अद्भुत यम की मार
- अधरों पे रखते सदा
- अध्यात्म का आकाश
- अनछूई राह
- अनजानी राहों के राही
- अनमोल ओ जमारो क्यूं तूं व्यर्थ गमावै रे
- अनमोल जिन्दगी
- अनमोल तुम्हारा यह जीवन, इसकी कीमत पहचान
- अनशन गीत
- अनशन गीत
- अनाथी
- अनुनय सुन लो भगवान्! सत्पथ पर बढ़ता जाऊं,
- अनुभव की किरणें
- अनेकान्त
- अन्तर
- अन्तर सन्तुलन
- अन्तर् भावना