गीतिका संग्रह — पृष्ठ 48
2856 में से 2821–2856
- हार से न निराश होते
- हार-जीत
- हिम्मत को साथी
- हिल-मिल संघ-चतुष्टय. उत्तव आज मनाएंगे।
- हिव हेम प्रभाते
- हृदय बसै गुरुवर माणक गणी।
- हे ज्योतिपुंज स्वीकारो
- हे तुलसी तेरे चरणों में वन्दन है बारम्बार
- हे दयालो! देव! तेरी शरण हम सब आ रहे
- हे दिव्य ज्योति, तुमको प्रणाम
- ५, हे पार्श्व जिन
- हे प्रभो! तुम ही हमारे नाथ हो।
- हे प्राण-देवते! तेरी ज्यों-ज्यों स्मृति हो रही।
- हे हम संदा भक्ति
- हे! महाश्रमण युगनायक
- हेलो जागण रो,
- है गौरवमय इतिहास, क्यों तुम भूल रहे।
- है चयन दिवस युवराज रो, गण आंगण खुशियां छाई।
- है जीवन थारो पाणी रो परपोटो,
- है धन्य आ धरा अठै, भगवान आज आया।
- है नश्वर जग की माया रे,
- है फूल वही जो प्रभु चरणों में चढ़ता
- है महारोग यह छुआछूत
- है लक्ष्य सामने
- है सफर यह जिन्दगी साथी! सदा बढ़ते चलो,
- हो ऐसा देश हमारा,
- हो गया नूतन सवेरा
- हो जाएगा सबेरा, मोह-नींद तू उड़ा ले,
- हो झूठा, झूठा इस दुनिया का खेल है,
- हो बल्लू-सुत वालहा वारु वीर-शासनविकसायो हो राज।
- हो रहा सत्ता का सत्कार
- होठों पर तेरे राम नाम, पर भीतर में जलती ज्वाला,
- होठों पै नित तेरे गीत गाऊं,
- होली रो ओ परव रंगीलो जग में आवै रे,
- होळी रो त्योंहार बावळो, बावळ घणी बढ़ावै जी।
- ५o