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महाप्राण गुरूदेव

सब धर्मो में बतलाई रे तप री शक्ति महान

Sab Dharmo Men Batlai Re Tap Ri Shakti Mahan

महाप्राण गुरूदेव

Record no.3017

सब धर्मो में बतलाई रे तप री शक्ति महान — Lyrics

सब धर्मो में बतलाई रे, तप री शक्ति महान। देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान।।

तपस्या है मंगलकारी, तपस्या है भवभय हारी। तपस्या केशर री क्यारी रे।।

तप से टूटे अघबंधन, आत्मा बन जाती कुंदन। मिट जाती उलझन सारी रे।।

करता जो भाव तपस्या, उसकी सब शांत समस्या। बन जाते देव पुजारी रे।।

बाहर से टूटे नाता, आत्मा का हो विज्ञाता। बन जाता वह अविकारी रे।।

जो शूरवीर होते हैं, वे ही तपस्या करते हैं। तप से ‘प्रमोद’ इकतारी रे।।

  1. 1.Sab Dharmo Mein Batlai Re Tap Ri Shakti Mahan
  2. 2.यह भजन तपस्या की महान शक्ति को शब्दों में बताता है। इसमें कहा गया है कि तपस्या मंगलकारी है और जीवन के दुखों को दूर करती है। तप से पापों के बंधन टूटते हैं, आत्मा शुद्ध होती है और मन की उलझन मिटती है। सच्ची तपस्या करने वाला शांत, निर्भय और पवित्र बनता है। यह भजन हमें तप, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश देता है।

Roman Transliteration

sab dharmo men batlai re, tap ri shakti mahan. devon ne garima gai re, tap ri shakti mahan..

tapasya hai mangalkari, tapasya hai bhavabhay hari. tapasya keshar ri kyari re..

tap se tute aghabandhan, atma ban jati kundan. mit jati ulajhan sari re..

karta jo bhav tapasya, usaki sab shant samasya. ban jate Dev pujari re..

bahar se tute nata, atma ka ho vijnata. ban jata vah avikari re..

jo shurvir hote hain, ve hi tapasya karte hain. tap se ‘pramod’ ikatari re..

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