‹ मंत्र उपाय
मैत्री का विकास
ऊँ ह्रीं श्रीं अमुकं दुष्टं साधय साधय अ सि आ उ सा नमः
- मित्रता का अभाव
- प्रतिदिन १ माला
- जिस व्यक्ति के साथ वैमनस्य हो उसका अमुकं के स्थान पर नाम पढ़ा जाए
- वैमनस्य दूर होता है, मित्रता का विकास होता है