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‹ मंत्र उपाय
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शत्रु-विजय (२)

मंत्र

को विस्मयोऽत्र यदि नाम गुणैरशेषैस् त्वं संश्रितो निरवकाशतया मुनीश ! दोषैरुपात्त-विविधाश्रय-जातगर्वैः स्वप्‍नान्तरेऽपि न कदाचिदपीक्षितोऽसि

मंत्र संख्या
प्रतिदिन १ माला
प्रयोग विधि
काली माला से १०८ बार मंत्र जप करें
परिणाम
शत्रु पर विजय प्राप्त होती है