Skip to content
‹ मंत्र उपाय
232 / 367

शत्रु-विजय (३)

मंत्र

इत्थं यथा तव विभूतिरभूज्जिनेन्द्र ! धर्मोपदेशनविधौ न तथा परस्य यादृक् प्रभा दिनकृतः प्रहतान्धकारा तादृक् कुतो ग्रहगणस्य विकाशिनोऽपि

मंत्र संख्या
२१ बार
परिणाम
शत्रु वश में होता है