‹ मंत्र उपाय
ज्वरनाश (३)
ऊँ णमो लोए सव्वसाहूणं ऊँ णमो उवज्झायाणं ऊँ णमो अरहंताणं ऐं ह्रीं नमः
- ज्वर
- २१ अथवा १०८ बार
- मंत्र का जप कर पछेवड़ी (उत्तरीय) के चारों कोनों पर गांठ देकर रोगी को ओढ़ाएं
- ज्वरनाश