‹ मंत्र उपाय
ज्वरनाश (४)
ॐ ह्रीं णमो लोए सव्वसाहूणं ॐ ह्रीं णमो उवज्झायाणं ॐ ह्रीं णमो आयरियाणं ॐ ह्रीं णमो सिद्धाणं ॐ ह्रीं णमो अरहंताणं एकाह्निक द्वयाह्निक त्रयाह्निक, चातुर्थिक महाज्वर क्रोधज्वर भयज्वर कामज्वर कलितरव महावीरान् बंध बंध ह्रां ह्रीं फट् स्वाहा
- शरीर का तापमान बढ़ना
- मंत्र का जप कर, नए वस्त्र पर गांठ लगा कर रोगी के सिर के नीचे रखने से शरीर का ताप दूर होता है । नींद सुखद आती है
- ज्वर का समाप्त होना