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‹ मंत्र उपाय
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नेत्र-चिकित्सा (४)

मंत्र

सोऽहं तथापि तव भक्तिवशान्मुनीश ! कर्तुं स्तवं विगतशक्तिरपि प्रवृत्तः प्रीत्याऽऽत्मवीर्यमविचार्य मृगो मृगेन्द्रं, नाभ्येति किं निजशिशोः परिपालनार्थम्

मंत्र संख्या
प्रतिदिन १ माला
परिणाम
नेत्र-रोग दूर होते हैं