‹ मंत्र उपाय
नेत्र-चिकित्सा (५)
सिंहासने मणिमयूखशिखाविचित्रे विभ्राजते तव वपुः कनकावदातम् बिम्बं वियद्-विलसदंशुलता-वितानं तुंगोदयाद्रिशिरसीव सहस्ररश्मेः
- प्रतिदिन १ माला
- १०८ बार पानी को अभिमंत्रित कर रोगी को पिलाएं
- नेत्र-पीड़ा दूर होती है । सर्प आदि का विष उतर जाता है