‹ मंत्र उपाय
सर्प-विष-निवारक (२)
त्वत्संस्तवेन भवसन्तति-सन्निबद्धं पापं क्षणात्क्षयमुपैति शरीरभाजाम् आक्रान्त-लोकमलिनीलमशेषमाशु सूर्यांशुभिन्नमिव शार्वरमन्धकारम्
- १ माला
- जब सर्प का दंश लगे तब मंत्र का प्रयोग करें
- सर्प कीलित हो जाता है, सारे पाप, संकट, छोटे-मोटे उपद्रव दूर हो जाते हैं