‹ मंत्र उपाय
सर्प-विष-निवारक (१)
रक्तेक्षणं समदकोकिल-कण्ठनीलं क्रोधोद्धतं फणिनमुत्फणमापतन्तम् आक्रामति क्रमयुगेन निरस्तशंकस् त्वन्नामनागदमनी हृदि यस्य पुंसः
- २१ बार
- जल को मंत्र से अभिमन्त्रित कर पीना
- सर्प का विष उतर जाता है