25 Bol
The foundational list of Jain metaphysics — beginning with the gati and jati of the soul, through karma, gunasthana and charitra. In traditional order.
गति चार
विस्तार से- नरक गति
- तिर्यंच गति
- मनुष्य गति
- देव गति
जाति पाँच
विस्तार से- एकेन्द्रिय
- द्वीन्द्रिय
- त्रीन्द्रिय
- चतुरिन्द्रिय
- पँचेन्द्रिय
काय छह
विस्तार से- पृथ्वीकाय
- अप् काय
- तेजस् काय
- वायुकाय
- वनस्पतिकाय
- त्रसकाय
इन्द्रिय पाँच
विस्तार से- स्पर्शन इन्द्रिय
- रसन इन्द्रिय
- घ्राण इन्द्रिय
- चक्षु इन्द्रिय
- श्रोत्र इन्द्रिय
पर्याप्ति छह
विस्तार से- आहार-पर्याप्ति
- शरीर-पर्याप्ति
- इन्द्रिय-पर्याप्ति
- श्वासोच्छ्वास-पर्याप्ति
- भाषा-पर्याप्ति
- मनः-पर्याप्ति
प्राण दस
विस्तार से- श्रोत्रेन्द्रिय प्राण
- चक्षुरिन्द्रिय प्राण
- घ्राणेन्द्रिय प्राण
- रसनेन्द्रिय प्राण
- स्पर्शनेन्द्रिय प्राण
- मनोबल
- वचनबल
- कायबल
- श्वासोच्छ्वास प्राण
- आयुष्य प्राण
योग पन्द्रह
विस्तार सेFour channels of mental activity
- सत्य मनोयोग
- असत्य मनोयोग
- मिश्र मनोयोग
- व्यवहार मनोयोग
Four channels of vocal activity
- सत्य वचनयोग
- असत्य वचनयोग
- मिश्र वचनयोग
- व्यवहार वचनयोग
Seven channels of bodily activity
- औदारिक काययोग
- औदारिक-मिश्र काययोग
- वैक्रिय काययोग
- वैक्रिय-मिश्र काययोग
- आहारक काययोग
- आहारक-मिश्र काययोग
- कार्मण काययोग
उपयोग बारह
विस्तार सेFive kinds of knowledge
- मतिज्ञान
- श्रुतज्ञान
- अवधिज्ञान
- मनःपर्यवज्ञान
- केवलज्ञान
Three kinds of false knowledge
- मति अज्ञान
- श्रुत अज्ञान
- विभंग अज्ञान
Four kinds of perception
- चक्षुःदर्शन
- अचक्षुःदर्शन
- अवधिःदर्शन
- केवलःदर्शन
कर्म आठ
विस्तार से- ज्ञानावरणीय
- दर्शनावरणीय
- वेदनीय
- मोहनीय
- आयुष्य
- नाम
- गोत्र
- अन्तराय
गुणस्थान चौदह
विस्तार से- मिथ्या दृष्टि
- सास्वादन सम्यग् दृष्टि
- मिश्र दृष्टि
- अविरत सम्यग् दृष्टि
- देशविरति श्रावक
- प्रमत्त संयत
- अप्रमत्त संयत
- निवृत्ति बादर सम्पराय
- अनिवृत्ति बादर सम्पराय
- सूक्ष्म सम्पराय
- उपशान्त कषाय
- क्षीण कषाय
- सयोगी केवली
- अयोगी केवली
पाँच इन्द्रियों के २३ विषय तेईस
विस्तार सेThree objects of hearing
- जीव शब्द
- अजीव शब्द
- मिश्र शब्द
Five objects of sight
- कृष्ण वर्ण
- नील वर्ण
- रक्त वर्ण
- पीत वर्ण
- श्वेत वर्ण
Two objects of smell
- सुरभि गन्ध
- दुरभि गन्ध
Five objects of taste
- तिक्त रस
- कटु रस
- कषाय रस
- आम्ल रस
- मधुर रस
Eight objects of touch
- गुरु स्पर्श
- लघु स्पर्श
- मृदु स्पर्श
- खर स्पर्श
- शीत स्पर्श
- उष्ण स्पर्श
- स्निग्ध स्पर्श
- रूक्ष स्पर्श
दस प्रकार के मिथ्यात्व दस
विस्तार से- जीव को अजीव
- अजीव को जीव
- धर्म को अधर्म
- अधर्म को धर्म
- साधु को असाधु
- असाधु को साधु
- मार्ग को कुमार्ग
- कुमार्ग को मार्ग
- मुक्त को अमुक्त
- अमुक्त को मुक्त
नौ तत्त्व के ११५ भेद एक सौ पन्द्रह
विस्तार से1. Jeev Ke 14 Bhed
Sukshma Ekendriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
Baadar Ekendriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
Dweendriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
Treendriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
Chaturindriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
Asangyi-Panchendriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
Sangyi-Panchendriya Ke Do Bhed
- अपर्याप्त
- पर्याप्त
2. Ajeev Ke 14 Bhed
Dharmaastikaay Ke Teen Bhed
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
Adharmaastikaay Ke Teen Bhed
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
Akaashaastikaay Ke Teen Bhed
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
Kaal Ka Ek Bhed
- काल
Pudgalaastikaay Ke Chaar Bhed
- स्कन्ध
- देश
- प्रदेश
- परमाणु
3. Punya Ke 9 Bhed
- अन्न-पुण्य
- पान-पुण्य
- लयन (स्थान)-पुण्य
- शय्या-पुण्य
- वस्त्र-पुण्य
- मन-पुण्य
- वचन-पुण्य
- काय-पुण्य
- नमस्कार-पुण्य
4. Paap Ke 18 Bhed
- प्राणातिपात पाप
- मृषावाद पाप
- अदत्तादान पाप
- मैथुन पाप
- परिग्रह पाप
- क्रोध पाप
- मान पाप
- माया पाप
- लोभ पाप
- राग पाप
- द्वेष पाप
- कलह पाप
- अभ्याख्यान पाप
- पैशुन्य पाप
- पर-परिवाद पाप
- रति-अरति पाप
- माया-मृषा पाप
- मिथ्यादर्शनशल्य पाप
5. Aashrav Ke 20 Bhed
- मिथ्यात्व आस्रव
- अव्रत आस्रव
- प्रमाद आस्रव
- कषाय आस्रव
- योग आस्रव
- प्राणातिपात आस्रव
- मृषावाद आस्रव
- अदत्तादान आस्रव
- मैथुन आस्रव
- परिग्रह आस्रव
- श्रोत्रेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- चक्षुरिन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- घ्राणेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- रसेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- स्पर्शनेन्द्रिय-प्रवृत्ति आस्रव
- मन-प्रवृत्ति आस्रव
- वचन-प्रवृत्ति आस्रव
- काय-प्रवृत्ति आस्रव
- भण्डोपकरण रखने में अयत्ना करना आस्रव
- शुचि-कुशाग्र मात्र दोष सेवन आस्रव
6. Sanvar Ke 20 Bhed
- सम्यक्त्व संवर
- व्रत संवर
- अप्रमाद संवर
- अकषाय संवर
- अयोग संवर
- प्राणातिपात विरमण संवर
- मृषावाद विरमण संवर
- अदत्तादान विरमण संवर
- अब्रह्मचर्य-विरमण संवर
- परिग्रह-विरमण संवर
- श्रोत्रेन्द्रिय-निग्रह संवर
- चक्षुरिन्द्रिय-निग्रह संवर
- घ्राणेन्द्रिय-निग्रह संवर
- रसनेन्द्रिय-निग्रह संवर
- स्पर्शनेन्द्रिय-निग्रह संवर
- मनो-निग्रह संवर
- वचन-निग्रह संवर
- काय-निग्रह संवर
- भण्डोपकरण रखने में अयत्ना न करना संवर
- शुचि-कुशाग्र मात्र दोष सेवन न करना संवर
7. Nirjara Ke 12 Bhed
- अनशन
- ऊनोदरी
- भिक्षाचारी
- रसपरित्याग
- काय-क्लेश
- प्रतिसंलीनता
- प्रायश्चित
- विनय
- वैय्यावृत्य
- स्वाध्याय
- ध्यान
- कायोत्सर्ग
8. Bandh Ke 4 Bhed
- प्रकृति-बन्ध
- स्थिति-बन्ध
- अनुभाग-बन्ध
- प्रदेश-बन्ध
9. Moksh Ke 4 Bhed
- ज्ञान
- दर्शन
- चारित्र
- तप
आत्मा आठ
विस्तार से- द्रव्य आत्मा
- कषाय आत्मा
- योग आत्मा
- उपयोग आत्मा
- ज्ञान आत्मा
- दर्शन आत्मा
- चारित्र आत्मा
- वीर्य आत्मा
दण्डक चौबीस
विस्तार सेThe hellish
- सात नारकी का दण्डक
Ten of the Bhavanpati gods
- असुरकुमार
- नागकुमार
- सुपर्णकुमार
- विद्युत्कुमार
- अग्निकुमार
- द्वीपकुमार
- उदधिकुमार
- दिक् कुमार
- वायुकुमार
- स्तनितकुमार
Nine of the tiryanch beings
- पृथ्वीकाय
- अप् काय
- तेजस् काय
- वायुकाय
- वनस्पतिकाय
- द्वीन्द्रिय
- त्रीन्द्रिय
- चतुरिन्द्रिय
- तिर्यंच पंचेन्द्रिय
The remaining four
- मनुष्य पंचेन्द्रिय
- व्यन्तर देव
- ज्योतिष्क देव
- वैमानिक देव
लेश्या छह
विस्तार से- कृष्ण लेश्या
- नील लेश्या
- कापोत लेश्या
- तेजो लेश्या
- पद्म लेश्या
- शुक्ल लेश्या
दृष्टि तीन
विस्तार से- सम्यक् दृष्टि
- मिथ्या दृष्टि
- मिश्र दृष्टि
ध्यान चार
विस्तार से- आर्त ध्यान
- रौद्र ध्यान
- धर्म ध्यान
- शुक्ल ध्यान
छह द्रव्यों का ज्ञान छह
विस्तार से- धर्मास्तिकाय
- अधर्मास्तिकाय
- आकाशास्तिकाय
- काल
- जीवास्तिकाय
- पुद्गलास्तिकाय
राशि दो
विस्तार से- जीव राशि
- अजीव राशि
श्रावक के १२ व्रत बारह
विस्तार सेFive lesser vows
- अहिंसा अणुव्रत
- सत्य अणुव्रत
- अचौर्य अणुव्रत
- ब्रह्मचर्य अणुव्रत
- अपरिग्रह अणुव्रत
Three merit vows
- दिक् व्रत
- भोग-उपभोग व्रत
- अनर्थदण्ड व्रत
Four disciplinary vows
- सामायिक व्रत
- देशावकाशिक व्रत
- पौषध व्रत
- अतिथि संविभाग व्रत
साधु के ५ महाव्रत पाँच
विस्तार से- अहिंसा महाव्रत
- सत्य महाव्रत
- अचौर्य महाव्रत
- ब्रह्मचर्य महाव्रत
- अपरिग्रह महाव्रत
भाँगा उनचास
विस्तार सेThree karan — three ways of acting
- करना
- कराना
- अनुमोदन
Three yog — three channels of action
- मन
- वचन
- काया
चारित्र पाँच
विस्तार से- सामायिक
- छेदोपस्थापनीय
- परिहार विशुद्धि
- सूक्ष्म सम्पराय
- यथाख्यात