33th Tirthankar
भगवान संभवनाथ
Sambhavnath
अश्व
स्वर्ण
Family & Sangha
- जितारि
- सेना
- श्रावस्ती
- इक्ष्वाकुवंश
- त्रिमुख
- दुरितारि
- 102
- शाल
Nirvana place
सम्मेद शिखर
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ॐ ह्रीं श्री संभवनाथाय नमः ।
संभव साहिब समरियै । संभव साहिब समरियै, ध्यायो है जिन निर्मल ध्यान कै । एक पुद्गल दृष्टि थाप नै, कीधो है मन मेर समान कै ।। १ ।।
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