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काया थांरी नगरी में बोलै जको कुण है।

माटी री काया में, क्यूं मन! तूं लुभावै,

Mati Ri Kaya Men, Kyun Man! Tun Lubhavai,

काया थांरी नगरी में बोलै जको कुण है।

गीत क्रमांक1452

माटी री काया में, क्यूं मन! तूं लुभावै, — Lyrics

माटी री काया में, क्यूं मन! तूं लुभावै, मन! तूं लुमावै, अपणो मान भुलावै।।

जिण री सुरक्षा रो तूं नित ख्याल राखै, उस काया नै लोगां मशाणै पुगावै।।1।।

अपणै परायै रो तूं भेद न जाण्यो, अज्ञान में क्यूं हीरो दांव लगावै।।2।।

बिजली रै झबके री ज्यूं राग रंग सारा, नश्‍वर विभुता पर तूं क्यूं इतरावै।।3।।

काई भरोसो उड़ज्या कद ओ पंछी, बालू री भीत कै ठा कद ढह ज्यावै।।4।।

इण दीवला में अनुभव ज्योत जलाले, साधलै परम पद 'विजय' सुझावै।।5।।

Roman Transliteration

mati ri kaya men, kyun man! tun lubhavai, man! tun lumavai, apano man bhulavai..

jin ri suraksha ro tun nit khyal rakhai, us kaya nai logan mashanai pugavai..1..

apanai parayai ro tun bhed n janyo, ajnan men kyun hiro danv lagavai..2..

bijli rai jhabke ri jyun rag rang sara, nashvar vibhuta par tun kyun itaravai..3..

kai bharoso udajya kad o panchhi, balu ri bhit kai tha kad dhah jyavai..4..

in divla men anubhav jyot jalale, sadhlai param pad 'vijay' sujhavai..5..

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