मुख्य सामग्री पर जाएँ
शासन कल्पतरू

महाप्रज्ञ अभिवंदना – उजली भोर आ सुखकार

Mahapragya Abhivandna – Ujali Bhor A Sukhkar

साध्वी निर्वाणश्रीजी · शासन कल्पतरू

गीत क्रमांक2989

महाप्रज्ञ अभिवंदना – उजली भोर आ सुखकार — Lyrics

उजली भोर आ सुखकार, जन्म दिवस रो ओ त्यौंहार, गण रे कण-कण में खुशहाली छाई, आंगण नई बहार। आई पुण्य घड़ी, बरसे इमरत री झड़ी, लागी लागी रंगरळी ।।

मणिधारी बालू रा जात, भगिनी मालूजी रा भ्रात, कालू कर स्यूं पा दीक्षा, मुनि तुलसी स्यूं ली शिक्षा। थांरी प्रज्ञा किरणां स्यूं चमके है, भैक्षव गण गिगनार।।

नवयुग रा हो नया प्रभात, मेधा है थांरी अवदात, दिव्य दृष्टि रा हो दाता, अनुपम युग रा संधाता। अपणे पौरुष स्यूं खोल्या है, थेतो नव निधियां रा द्वार।।

सरस्वती रा पुत्र ललाम, रचनावां थारी अभिराम, तुलसी युग रा योगीश्वर, गूंजे चँहु दिशि प्रेक्षा-स्वर। थांरे अवदानां रो अनुगुंजन है, सात समन्दर पार।।

वीर-गोयम रो ओ शासन, मन भावन है अनुशासन, जुग जुग जोड़ी अमर रहे, सुख सरिता री धार बहे। मंगल बेला में अर्पित है, निर्मल भावां रो उपहार।।

  1. 1.Mahapragya Abhivandana – Ujali Bhor Aa Sukhkaar
  2. 2.यह भक्ति-गीत आचार्य महाप्रज्ञजी के जन्मोत्सव पर श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का सुंदर भाव प्रस्तुत करता है। इसमें उनके जीवन, ज्ञान, साधना, प्रज्ञा और समाज के प्रति महान योगदान का वर्णन किया गया है। गीत बताता है कि आचार्यश्री ने अपने विचारों, शिक्षा और आध्यात्मिक दृष्टि से अनगिनत लोगों के जीवन को प्रकाशित किया। उनके जन्मदिवस को मंगलमय उत्सव के रूप में मनाया गया है।

Roman Transliteration

ujali bhor a sukhkar, janma divas ro o tyaunhar, gan re kan-kan men khushhali chhai, angan nai bahar. ai punya ghadi, barse imarat ri jhadi, lagi lagi rangarli ..

manidhari balu ra jat, bhagini maluji ra bhrat, Kalu kar syun pa diksha, Muni Tulsi syun li shiksha. thanri prajna kirnan syun chamke hai, bhaikshav gan gignar..

navyug ra ho naya prabhat, medha hai thanri avadat, divya drishti ra ho data, anupam yug ra sandhata. apane paurush syun kholya hai, theto nav nidhiyan ra dvar..

Saraswati ra putra lalam, rachnavan thari abhiram, Tulsi yug ra yogishvar, gunje chanhu dishi Preksha-svar. thanre avadanan ro anugunjan hai, sat samandar par..

vir-goyam ro o shasan, man bhavan hai anushasan, jug jug jodi amar rahe, sukh sarita ri dhar bahe. Mangal bela men arpit hai, nirmal bhavan ro upahar..

← लय: शासन कल्पतरू← अनुक्रमणिका