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‹ चौबीस तीर्थंकर
1प्रथम तीर्थंकर

भगवान ऋषभदेव

Rishabhdev

ऋषभनाथआदिनाथ
चिन्हवृषभ
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
नाभिराय
पिता की गति
नागकुमार
माता
मरुदेवी
माता की गति
सिद्ध
जन्म नगरी
अयोध्या
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
गोमुख
यक्षिणी
चक्रेश्वरी
गणधर
84
चैत्य वृक्ष
न्यग्रोध (वट)

जीवन की तिथियाँ

जन्म तिथि
चैत्र कृ. 8
नक्षत्र
उत्तराषाढा
दीक्षा तिथि
चैत्र कृ. 8
दीक्षा साथी
4000
केवलज्ञान तिथि
फाल्गुन कृ. 11
छद्मस्थ काल
1000 वर्ष

चिह्न, शरीर और आयु

लक्षण चिह्न
वृषभ
शरीर मान
500 धनुष
साधक जीवन
1 लाख पूर्व
आयुमान
84 लाख पूर्व

निर्वाण स्थल

अष्टापद

निर्वाण तिथि
माघ कृ. 13
निर्वाण साथी
10,000
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स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नमः ।

प्रणमूं प्रथम जिनन्द नैं जय जय जिन चंदा ।। वन्दु बेकर जोड़ नैं, जुग आदि जिनिन्दा । कर्म-रिपु-गज ऊपरै, मृगराज मुनिन्दा ।। १ ।।

मैं इस युग के आदि अर्हत् ऋषभदेव को बद्धाञ्जलि होकर वंदना करता हूं । हे मुनीन्द्र ! कर्मशत्रु रूप हाथी को आहत करने के लिए तुम सिंह के समान हो ।

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भक्तामर स्तोत्र

आचार्य मानतुंग की यह स्तुति प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव को समर्पित है — कुल चौवालीस श्लोक।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)