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‹ चौबीस तीर्थंकर
2द्वितीय तीर्थंकर

भगवान अजितनाथ

Ajitnath

चिन्हहाथी
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
जितशत्रु
माता
विजया
जन्म नगरी
अयोध्या
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
महायक्ष
यक्षिणी
अजिता
गणधर
95
चैत्य वृक्ष
सप्तपर्ण

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं अजितनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री अजितनाथाय नमः ।

अहो प्रभु ! तुम ही दायक शिवपंथ नां । अहो प्रभु ! अजित जिनेश्‍वर आपरो, ध्याऊं ध्यान हमेश हो । अहो प्रभु ! अशरण शरण तू ही सही, मेटण सकल कलेश हो ।। १ ।।

प्रभो ! अर्हत् अजित ! मैं प्रतिदिन तुम्हारा ध्यान करता हूं । तुम्हीं अशरण के शरण हो और तुम्हीं हो सब संक्लशों को दूर करने वाले ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)