2द्वितीय तीर्थंकर
भगवान अजितनाथ
Ajitnath
हाथी
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- जितशत्रु
- विजया
- अयोध्या
- इक्ष्वाकुवंश
- महायक्ष
- अजिता
- 95
- सप्तपर्ण
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
नक्शे पर देखें ↗स्तुति
ॐ ह्रीं श्री अजितनाथाय नमः ।
अहो प्रभु ! तुम ही दायक शिवपंथ नां । अहो प्रभु ! अजित जिनेश्वर आपरो, ध्याऊं ध्यान हमेश हो । अहो प्रभु ! अशरण शरण तू ही सही, मेटण सकल कलेश हो ।। १ ।।
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