मुख्य सामग्री पर जाएँ
‹ चौबीस तीर्थंकर
3तृतीय तीर्थंकर

भगवान संभवनाथ

Sambhavnath

चिन्हअश्व
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
जितारि
पिता की गति
दूसरे देवलोक ईशान में
माता
सेना
माता की गति
सिद्ध
जन्म नगरी
श्रावस्ती
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
त्रिमुख
यक्षिणी
दुरितारि
गणधर
102
चैत्य वृक्ष
शाल

जीवन की तिथियाँ

जन्म तिथि
मार्गशीर्ष शु. 14
नक्षत्र
मृगशीर्ष
दीक्षा तिथि
मार्गशीर्ष शु. 15
दीक्षा साथी
1000
केवलज्ञान तिथि
कार्तिक कृ. 5
छद्मस्थ काल
चौदह वर्ष

चिह्न, शरीर और आयु

लक्षण चिह्न
घोड़ा
शरीर मान
400 धनुष
साधक जीवन
1 लाख पूर्व 4 पुर्वांगकम
आयुमान
60 लाख पूर्व

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

निर्वाण तिथि
चैत्र शु. 5
निर्वाण साथी
1,000
नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री संभवनाथाय नमः ।

संभव साहिब समरियै । संभव साहिब समरियै, ध्यायो है जिन निर्मल ध्यान कै । एक पुद्गल दृष्‍टि थाप नै, कीधो है मन मेर समान कै ।। १ ।।

प्रभो ! तुमने निर्मल ध्यान किया, किसी एक वस्तु पर दृष्टि को टिका मन को मेरु के समान अडोल बना लिया ।

पूरी चौबीसी पढ़ें (7 गाथा) ›

स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)