3तृतीय तीर्थंकर
भगवान संभवनाथ
Sambhavnath
अश्व
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- जितारि
- सेना
- श्रावस्ती
- इक्ष्वाकुवंश
- त्रिमुख
- दुरितारि
- 102
- शाल
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
नक्शे पर देखें ↗स्तुति
ॐ ह्रीं श्री संभवनाथाय नमः ।
संभव साहिब समरियै । संभव साहिब समरियै, ध्यायो है जिन निर्मल ध्यान कै । एक पुद्गल दृष्टि थाप नै, कीधो है मन मेर समान कै ।। १ ।।
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