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‹ चौबीस तीर्थंकर
3तृतीय तीर्थंकर

भगवान संभवनाथ

Sambhavnath

चिन्हअश्व
वर्णस्वर्ण

परिवार एवं संघ

पिता
जितारि
माता
सेना
जन्म नगरी
श्रावस्ती
वंश
इक्ष्वाकुवंश
यक्ष
त्रिमुख
यक्षिणी
दुरितारि
गणधर
102
चैत्य वृक्ष
शाल

निर्वाण स्थल

सम्मेद शिखर

परंपरा के अनुसार यहीं संभवनाथ ने निर्वाण प्राप्त किया।

नक्शे पर देखें ↗

स्तुति

नाम-मंत्र

ॐ ह्रीं श्री संभवनाथाय नमः ।

संभव साहिब समरियै । संभव साहिब समरियै, ध्यायो है जिन निर्मल ध्यान कै । एक पुद्गल दृष्‍टि थाप नै, कीधो है मन मेर समान कै ।। १ ।।

प्रभो ! तुमने निर्मल ध्यान किया, किसी एक वस्तु पर दृष्टि को टिका मन को मेरु के समान अडोल बना लिया ।

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स्रोत — कल्पसूत्र · त्रिषष्टिशलाकापुरुषचरित (श्वेतांबर परम्परा)