3तृतीय तीर्थंकर
भगवान संभवनाथ
Sambhavnath
अश्व
स्वर्ण
परिवार एवं संघ
- जितारि
- दूसरे देवलोक ईशान में
- सेना
- सिद्ध
- श्रावस्ती
- इक्ष्वाकुवंश
- त्रिमुख
- दुरितारि
- 102
- शाल
जीवन की तिथियाँ
- मार्गशीर्ष शु. 14
- मृगशीर्ष
- मार्गशीर्ष शु. 15
- 1000
- कार्तिक कृ. 5
- चौदह वर्ष
चिह्न, शरीर और आयु
- घोड़ा
- 400 धनुष
- 1 लाख पूर्व 4 पुर्वांगकम
- 60 लाख पूर्व
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- चैत्र शु. 5
- 1,000
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री संभवनाथाय नमः ।
संभव साहिब समरियै । संभव साहिब समरियै, ध्यायो है जिन निर्मल ध्यान कै । एक पुद्गल दृष्टि थाप नै, कीधो है मन मेर समान कै ।। १ ।।
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