गीतिका संग्रह — पृष्ठ 10
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- करूणा सागर महावीर
- करें उपशम की साधना,
- करें जय गणिवर को वन्दन
- करें हम अंतर अनुसंधान।
- करें हम अभिनन्दन
- करें हम आध्यात्मिक उत्थान।
- करें हम मंगल अभ्युत्थान।
- करें हम महाप्रज्ञ का ध्यान
- करें हम वंदन बारम्बार।
- करें हम संस्कृति का सद्ज्ञान,
- करो तपस्या जग जाये जीवन ज्योति
- करो तपस्या मिटे समस्या सुनलो रे
- करो भरोसा गुरु बचनों पर।
- करो विसर्जन, करो विसर्जन, करो विसर्जन रे,
- कर्म का फल
- कर्मफल
- कर्मा स्यूं ए ढकी आतमा दूर हटा ओ घूंघटियो,
- कर्मों का नर है मारा, इनके आगे जग है हारा,
- कर्मों की मार
- कल की आशा में साथी! खोता क्यों आज है,
- कल की छाया
- कलश
- कला-कलाकार
- कलियुग
- कलियुग में भी सतयुग जैसा जीवन सुखी बनाएं,
- कल्पतरू रा बीज फल्या
- कल्पनाएं सुनहरे भविष्य की करो
- कवि, यह कलम पुरानी है
- कविते, क्या तू कुंठित है ?
- कव्वाली
- कषाय
- कहां रूक जाए रे पता क्या बयार का?
- कहीं रुदन है कहीं गीत है।
- कहे चाहे कुछ भी जमाना यह सारा,
- कहै किसनोजी चाल-चाल
- काँटों में फूलों में सम रहना जीवन है,
- कांटों से भरा पथ यह हमारा है,
- काई करे रै गुमान
- काटों के संग में सदा, फूलों का उपहार मिला,
- काम से मत जी चुराओ
- काया का स्वरूप
- काया काची रे
- काया की माया, दो दिन में बन जायेगी माटी,
- काया मिट्टी की
- काया री बाड़ी निरखी नै हरी रे
- काया है, झूठी माया है,
- कारखाने से शो-रूम
- काल
- काल
- काल की विचित्र गति
- कालू कालू बोलूं
- कालू गण-सिणगार,
- कालू गणेश्वर आपरो – अहो प्रभु! ध्यान धरूं नित आपरो
- कालू ने भजो
- कालू स्तुति
- कालू-कालू रे
- कालूगुरु रै चरणां में सी बार, म्हारी वंदना,
- कालूप्रभु-पादाम्बुज अर्पित भावभीनी वंदना।
- काले बादल नभ में आते।
- कितना सुखद सुनहरा बचपन।