गीतिका संग्रह — पृष्ठ 16
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- जय बोलें सम्वत्सर पर्व मनाएं जय बोलें,
- जय बोलो आदिम जिनवर की, मरुदेवा सुत तीर्थंकर की।
- जय बोलो तुलसी गणिवर की
- जय बोलो मघवा
- जय बोलो वीर जिनेश्वर की।
- जय बोलो संघ
- जय बोलो, जय बोलो, धर्म—संघ की जय बोलो,
- जय बोलो! तुलसी गुरुवर की
- जय भिक्षु-भिक्षु सब गाएं।
- जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी
- जय महाप्रज्ञ की जय हो
- जय महाप्रज्ञ गुरुदेव
- जय महाप्रज्ञ गुरुराज,
- जय महावीर की बोलो,
- जय महावीर भगवान
- जय महाश्रमण गुरुवर
- जय महाश्रमण मंगलदायी
- जय मारवाड़ के स्वाभिमान
- जय युगद्रष्टा! जय युणस्रष्टा!
- जय रा आभारी
- जय वीर प्रभु
- जय हे जय तुलसी, तुलसी जपां दिन-रात।
- जय हो कल्लू-सुत
- जय हो, सदा विजय हो,
- जय-गान
- जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमण
- जय-जय स्वामी हो भिक्षू_गुण-मणि-दरिया।
- जय-जय हे मर्यादाकार! खोजा आस्था का आधार,
- जयकारी रे! वीर! तुम्हारा प्यारा नामरे,
- जयवंतो शासण रेऽऽ, भैक्षव आसन रेऽऽ
- जयाचार्य की कीर्तिगाथा
- जयाचार्य के प्रति
- (जयाचार्य के प्रति)
- जरा सोच ले तूं मन में स्याणा,
- जर्दे से दूर रहना
- जलता रहा तम में भी जो बनकर सदा मशाल,
- जहाँ हर डाल—डाल पर खिलते तप के फूल,
- जाग अरे तू बीती जाये रे उमरिया,
- जाग उठो युवकों अब अपना सोया शौर्य जगाना है
- जाग उठो, ओ युवा बन्धुओं ! कुछ करके दिखलाना है,
- जाग जा मौत रो
- जाग रहा आनन्द
- जाग रे जाग अरे इंसान! सूर्य उदियाया है,
- जाग रे मुसाफिर तूं नींद में क्यों सोया है,
- जागरण जैन का जग में, भिक्षु की विजय हो जय हो।
- जागृत धर्म हमारा, जीवित धम हमारा,
- जागृत युवा समाज चाहिए
- जागृत संत
- जागृत होने का क्षण
- जागो ए, जागो ए, जागो ए, जागो ए, सोने वालों,
- जागो जागो अब जागणै री वेळा आई है।
- जागो जीवन अति चंचल है,
- जागो भाई भोर हुई,
- जागो रे भाई जागो, हुई है अब भोर,
- जागो हे! जागो! जागो हे! जागो हे!
- जागो! जागो रे, जीवन यों ही बीत न जाए,
- जागोजी, जागोजी, शुभ अवसर आया है जागो,
- जाना सभी को है निश्चित यहां से,
- जानो मात-पिता उपकार
- जाप बड़ा हितकारी