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तपस्या जीवन रो श्रृंगार

Tapasya Jivan Ro Shrringar

मुनि श्री कन्हैयालाल जी ‘कमल’

Record no.3045

तपस्या जीवन रो श्रृंगार — Lyrics

तपस्या जीवन रो श्रृंगार सारी दुनिया कवै, तप में भारी चमत्कार सारी दुनिया कवै। हिम्मत री है कीमत भारी, हिम्मत री है महिमा न्यारी, तपस्या हिम्मत रो आधार सारी दुनिया कवै। वीर पुरुष ही तपस्या करसी, जन्म जन्म रा पातक झरसी, सारो हिम्मत रो व्यापार सारी दुनिया कवै। तप करने स्यूं गुण चमकैला, तप र आगे देव झुकैला, तप में शक्ति है अणपार सारी दुनिया कवै। तप दीपक री ज्योति निराली, अन्तरतम को हरने वाली, तपस्या इच्छित फल दातार सारी दुनिया कवै। तप गंगा में सगल्या न्हाओ, मुनि ‘कन्हैया’ मोद मनाओ, होसी शासाण गुलजार सारी दुनिया कवै।

  1. 1.Tapasya Jivan Ro Shringaar
  2. 2.यह सुप्रसिद्ध भजन मुनि श्री कन्हैयालाल जी ‘कमल’ द्वारा रचित है, जो तप (तपस्या) की महिमा और शक्ति का सुंदर बखान करता है। राजस्थानी पुट वाली इस रचना में बताया गया है कि तपस्या केवल शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि जीवन का असली श्रृंगार है। कवि के अनुसार, तप से आत्मा के पुराने पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति में अदम्य साहस का संचार होता है। यह गीत हमें आत्म-शुद्धि और संकल्प शक्ति की प्रेरणा देता है।

Roman Transliteration

tapasya jivan ro shrringar sari duniya kavai, tap men bhari chamatkar sari duniya kavai. himmat ri hai kimat bhari, himmat ri hai mahima nyari, tapasya himmat ro adhar sari duniya kavai. vir purush hi tapasya karsi, janma janma ra patak jharsi, saro himmat ro vyapar sari duniya kavai. tap karne syun gun chamkaila, tap r age Dev jhukaila, tap men shakti hai anapar sari duniya kavai. tap dipak ri jyoti nirali, antaratam ko harne vali, tapasya ichchhit phal datar sari duniya kavai. tap ganga men sagalya nhao, Muni ‘kanhaiya’ mod manao, hosi shasan guljar sari duniya kavai.

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