लय: संयममय जीवन हो
इस लय पर 22 रचनाएँ।
- [२२]
- ॐ ऋषभाय नम: ॐ
- अपनी आत्मा में स्थित होकर जिनवर के गुण गाएं।
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
- आयो महावीर रो हेलो।
- कलियुग में भी सतयुग जैसा जीवन सुखी बनाएं,
- चित्त समाधि गीत
- जय महाप्रज्ञ की जय हो
- जागृत धर्म हमारा, जीवित धम हमारा,
- जीवनको सरसायें,
- तुलसी महाप्रज्ञ की प्रतिकृति
- ध्यान साधना
- पर्व पजूसण आयो,
- बच्चे हों संस्कारी।
- बारहवां व्रत
- भिक्षु भिक्षु भजन हो, तन से, मन से और वचन से
- भिक्षु भिक्षु सब गाएं
- मन म्हारो महकायो,
- मिल्यो अमोलक मिनख जमारो,
- मीठी वाणी
- वर्षी तप करकै, श्रावकजी नव इतिहास बणायो,
- सतत विकासी श्रमण-संघ-संस्कृति का एक उदय हो।