23तेईसवें तीर्थंकर
भगवान पार्श्वनाथ
Parshvanath
सर्प
नील (श्याम)
परिवार एवं संघ
- अश्वसेन
- चौथे देवलोक माहेन्द्र में
- वामा
- चौथे देवलोक माहेन्द्र में
- वाराणसी
- इक्ष्वाकुवंश
- पार्श्व (धरणेन्द्र)
- पद्मावती
- 10
- धातकी (धव)
जीवन की तिथियाँ
- पौष कृ. 10
- विशाखा
- पौष कृ. 11
- 300
- चैत्र कृ. 4
- चौरासी दिन
चिह्न, शरीर और आयु
- फणी
- 9 हाथ
- 70 वर्ष
- 100 वर्ष
निर्वाण स्थल
सम्मेद शिखर
- श्रावण शु. 8
- 33
स्तुति
ॐ ह्रीं श्री पार्श्वनाथाय नमः ।
पारस देव ! तुम्हारा दर्शन भाग भला सोई पावै हो । भाग भला सोई पावै, हूं वारि जाऊं, जीव मगन हो ज्यावै हो पारस देव ! लोह कंचन करै पारस काचो, ते कहो कर कुण लेवै हो । पारस तू प्रभु साचो पारस, आप समो कर देवै हो ।। १ ।।
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