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पच्चक्खाण

चौविहार

सूर्यास्त के बाद चारों प्रकार के आहार का त्याग — अन्न, पानी, मेवा और मुखवास। रात्रि-भोजन-त्याग का मूल रूप।

समय कैसे निकलता है

सूर्यास्त से पूर्व भोजन पूर्ण कर लिया जाता है और अगले सूर्योदय तक कुछ ग्रहण नहीं किया जाता।

उदाहरण — लाडनूं में 18:44 (9 सितंबर)।

समय की गणना सूर्योदय-सूर्यास्त से की गई है। यह प्रचलित श्वेताम्बर विधि पर आधारित है; अपने पंचांग अथवा गुरुजनों से पुष्टि कर लें।

मूल पाठ अभी यहाँ नहीं दिए गए हैं। वे प्रामाणिक तेरापंथ स्रोत से लिए जाने पर ही जोड़े जाएँगे।