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सरे का चौघड़िया

सरे, Canada — सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार दिन और रात की चौघड़िया, राहुकाल तथा अन्य काल।

सारणी आपके अपने समय के अनुसार चलती है; अभी चल रहा काल ऊपर दिखाया गया है।

सरे की चौघड़िया सारणी

उदाहरण — 23 अक्टूबर 2026 के लिए गणना की गई। सूर्योदय 07:43, सूर्यास्त 18:07।

दिन की चौघड़िया

चौघड़ियासमयभाव
शुभ07:43 – 09:01शुभ
रोग09:01 – 10:19टालें
उद्वेग10:19 – 11:37टालें
चर11:37 – 12:55सम
लाभ12:55 – 14:13शुभ
अमृत14:13 – 15:31शुभ
काल15:31 – 16:49टालें
शुभ16:49 – 18:07शुभ

रात की चौघड़िया

चौघड़ियासमयभाव
अमृत18:07 – 19:49शुभ
काल19:49 – 21:31टालें
शुभ21:31 – 23:13शुभ
रोग23:13 – 00:56टालें
उद्वेग00:56 – 02:38टालें
चर02:38 – 04:20सम
लाभ04:20 – 06:02शुभ
अमृत06:02 – 07:44शुभ

अन्य काल

  • राहु काल14:13 – 15:31
  • काल वेला07:43 – 09:01
  • वार वेला10:19 – 11:37
  • काल रात्रि06:02 – 07:44

आठ चौघड़िया और उनका अर्थ

उद्वेग
बेचैनी का काल — नया काम टाल दिया जाता है; सरकारी कामकाज के लिए इसे स्वीकार्य माना गया है।
चर
चलायमान काल — यात्रा, आवागमन और चलती-फिरती गतिविधियों के लिए उपयुक्त।
लाभ
लाभ का काल — व्यापार, नया व्यवसाय, शिक्षा आरंभ और क्रय-विक्रय के लिए शुभ।
अमृत
सर्वाधिक शुभ काल — किसी भी शुभ कार्य का आरंभ इसमें किया जा सकता है।
काल
अशुभ काल — शुभ कार्य वर्जित; धन-संचय से जुड़े कार्यों के लिए कुछ परंपराओं में स्वीकार्य।
शुभ
शुभ काल — विवाह, मांगलिक कार्य और संस्कारों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त।
रोग
रोग का काल — शुभ कार्यों के लिए टाला जाता है; कुछ परंपराओं में प्रतिस्पर्धा से जुड़े कार्य इसमें किए जाते हैं।

चौघड़िया क्या है

चौघड़िया दिन को आठ और रात को आठ भागों में बाँटने की एक पद्धति है। हर भाग का एक नाम है और उससे जुड़ा एक शुभ या अशुभ भाव। पश्चिमी और उत्तरी भारत में सामान्य कामों के लिए उपयुक्त समय देखने में इसका व्यापक प्रचलन है — यात्रा पर निकलना, दुकान खोलना, कोई नया अभ्यास आरंभ करना।

शब्द सामान्यतः "चौ" अर्थात् चार और "घड़ी" से बना माना जाता है। घड़ी लगभग चौबीस मिनट की प्राचीन इकाई है, इसलिए चार घड़ी यानी लगभग छियानवे मिनट — विषुव के दिन एक चौघड़िया इतनी ही लंबी होती है। शेष दिनों में यह घटती-बढ़ती रहती है, क्योंकि विभाजन घड़ी के घंटों का नहीं, वास्तविक दिनमान का होता है।

समय की गणना कैसे होती है

दिन का भाग सूर्योदय से सूर्यास्त तक होता है और उसे आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। रात का भाग सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक चलता है और उसका विभाजन भी इसी प्रकार होता है। दिनमान और रात्रिमान प्रायः बराबर नहीं होते, इसलिए एक ही तिथि पर दिन की चौघड़िया और रात की चौघड़िया की लंबाई अलग-अलग रहती है।

किस भाग को कौन-सा नाम मिलेगा, यह वार पर निर्भर करता है — और वार की गणना मध्यरात्रि से नहीं, सूर्योदय से की जाती है। इसीलिए मंगलवार की चौघड़िया मंगलवार के सूर्योदय से आरंभ होकर उस रात्रि तक चलती है, जिसे घड़ी बुधवार का तड़का कहेगी।

नगर के अनुसार समय क्यों बदलता है

यहाँ सब कुछ सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित है, और वे स्थान के अनुसार बदलते हैं। एक ही तिथि पर लाडनूँ और कोलकाता के सूर्योदय में लगभग एक घंटे का अंतर होता है, इसलिए दोनों की चौघड़िया में भी उतना ही अंतर आ जाता है। एक ही सारणी पूरे देश के काम नहीं आ सकती — यही कारण है कि यह पृष्ठ प्रत्येक नगर के लिए अलग से प्रकाशित किया गया है।

समय उसी नगर के स्थानीय समय क्षेत्र में दिखाया जाता है, जिसकी गणना उसके अक्षांश और देशांतर से की गई है।

चौघड़िया और राहुकाल

राहुकाल एक अलग गणना है — दिनमान का एक निश्चित आठवाँ भाग, जो वार से तय होता है। उसे चौघड़िया के स्थान पर नहीं, उसके साथ देखा जाता है। कई बार वह ऐसे समय पर पड़ जाता है जिसे चौघड़िया शुभ बताती है; ऐसी स्थिति में सामान्य व्यवहार यही है कि उस समय को टाल दिया जाए।

इन विषयों में परंपराएँ एक-सी नहीं हैं और क्षेत्रीय पंचांगों में भी अंतर मिलता है। जिस परिवार या समाज में जो गणना मान्य हो, व्यवहार में वही रखनी चाहिए।

सामान्य प्रश्न

सरे में एक दिन में कितनी चौघड़िया होती हैं?
दिन के भाग में आठ — सूर्योदय से सूर्यास्त तक, और रात के भाग में आठ — सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक। कुल मिलाकर सोलह।
सबसे शुभ चौघड़िया कौन-सी मानी जाती है?
अमृत को सर्वाधिक शुभ माना जाता है, उसके बाद शुभ और लाभ। चर सम है और प्रायः यात्रा के लिए उपयुक्त मानी जाती है। उद्वेग, काल और रोग को शुभ कार्यों के लिए सामान्यतः टाला जाता है।
सरे की चौघड़िया दूसरे नगर से अलग क्यों होती है?
विभाजन सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के वास्तविक समय का होता है, और वह स्थान पर निर्भर है। सरे का अपना सूर्योदय है, इसलिए उसकी सारणी भी अपनी है।
क्या वार मध्यरात्रि को बदलता है?
नहीं। चौघड़िया में वार की गणना सूर्योदय से होती है, इसलिए एक वार उस सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।