गीतिका संग्रह — पृष्ठ 13
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- गुरु ने जगाया
- गुरु बिना मिले भगवान नहीं
- गुरु भारमल्ल गुणधारी,
- गुरु महाप्रज्ञ का नाम
- गुरु हम सब के सितारे
- गुरु ही तारणहार
- गुरु-महिमा
- गुरुकृपा
- गुरुजी म्हांनै सीख सुणाई जी।
- गुरुदेव के चरणों में नित शीश झुकाता हूं,
- गुरुदेव थांरै नाम में है एक गजब री शक्ति
- गुरुदेव दिवाकर तुलसी को, श्रद्धायुत स्मृति में लाएं हम।
- गुरुदेव ने दिया जो, उसको अमर बनाएं।
- गुरुदेव पधारे आंगण, सतरंगे फूल खिले...
- गुरुदेव! अचानक
- गुरुदेव! तुम्हारे चरणों में ये शीष स्वयं झुक जाते हैं।
- गुरुदेव! थांरी खिण-खिण-याद सतावै, आययदेव!
- गुरुदेव! थांरी यादां
- गुरुदेव! थांरी यादां घणी सतावै रात-दिन,
- गुरुदेव! थांरो विरह सहयो नहीं जावै—आर्यदेव!।
- गुरुदेव! दयासागर, हमें है नाज तुम्हारे पर,
- गुरुवर ! थांरी याद सतावैजी
- गुरुवर के गीत मिलजुल गायें,
- गुरुवर के गुण गाएं, गुरु का हम ध्यान लगाएं
- गुरुवर के हम हैं आभारी, जागी है अस्मिता हमारी।
- गुरुवर को अभिवन्दन
- गुरुवर को निकट बिठाएं
- गुरुवर गुरुवर चरणन में, आनंद है—आनंद है।
- गुरुवर तुमको स्मरे
- गुरुवर तुलसी श्री चरणों में वन्दन-वन्दन-वन्दन।
- गुरुवर दर्श दिरावो नी, हेलो देर् बुलावा।
- गुरुवर महाप्रज्ञ का भावना से भजन करें।
- गुरुवर श्री तुलसी म्हारै कालजै री कोर है,
- गुरुवर हैं उपकारी, जाएँ हम बलिहारी,
- गुरुवर! एकर पधारो
- गुरुवर! कण-कण में नव चिन्तन, भर दो, भर दो, भर दो।
- गुरुवर! जीवन में आध्यात्मिक संस्कार चाहिए
- गुरुवर! तुम हो
- गुरुवर! तुम्हारे जीवन से दिव्य ज्योति पाएं।
- गुरुवर! बसो म्हारै मन मन्दिर में, करद्यो जीवन रो उद्धार,
- गुरुवर! म्हांरो स्वीकारो अभिवन्दन श्रद्धाभावां रो।
- गुरुवर! सुन लेना, अर्ज मेरी तुम सुन लेना,
- गुरुवर! स्वस्थ रहो दिन रात।
- गुरुवर! हमको मर्यादा का आधार चाहिए,
- गुरुवर! हो गुरुवर!
- गुरुशिक्षा पर दे ध्यान, बहिनों अब जागो,
- गुरूदेव आपरी जद
- गृह प्रवेश गीत – श्वेतांबर तेरापंथी परिवार
- गौतम गणधर बड़े महान
- गौरव गाथा भिक्षु के बलिदान की
- ५, गौरवमय इतिहास
- गौरवमयी विरुदावली
- गौरवशाली गण उपवन की सौरभ सब में फैलाएं।
- गौरवशाली भारतीय संस्कृति
- गौरवशाली संघ हमारा इसकी महिमा गाओ,
- ग्रंथि-विमोचन
- घट घट में दीप जलें
- घट-घट में चनणो
- घट-दीप जलाओ
- घड़ियां मिलन की सुहानी हैं, म्हानैं मिल्या अै पल वरदानी है।