गीतिका संग्रह — पृष्ठ 38
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- यही है जीने का विज्ञान,
- युग के प्रणेता तेरा
- युग-युग करना रखवाली
- युगपुरुष आर्यवर! – युग की पीड़ा का विष पीकर
- युगप्रधान आचार्यप्रवर को नमन करें,
- युगप्रधान! युगनायक! वंदन
- युगस्रष्टा
- युवकों! अविरल कदम बढाओ,
- युवा दम्पती ! निज जीवन में धार्मिकता को अपनाना,
- युवा बन्धुओं! आओ नव इतिहास बनाना है।
- युवाचार्य अभिवंदना
- युवाचार्य श्री अष्टम् गादी सोहै हो।
- युवाराजा म्हांनै प्यारा लागो, प्यारा लागो, मनहारा लागो,
- ये अक्षय तीज का उत्सव, अमल उपहार दे अभिनव।
- ये खुशियां, दो दिन की,
- यों तो चिहुं दिशि में उजियारा,
- यों तो दुनियां के मेले में लाखों नर आते जाते हैं,
- *योगाभ्यास से मिटायें रोग हम तमाम,
- यौवन वह जाए ज्यों नीर,
- रंग दुनियां का बड़ा
- रंगीन दुनियां
- रंगीला फाल्गुन
- रखो भरोसा निज कदमों पर।
- रग-रग मैं धर्म रमाल्यो थे
- रम जाना, रम जाना
- रसना रो संयम कर ले तूं,
- रहस्य
- रहो सतत गतिमान
- राखज्यो वश में शदा जबान
- राखो परठण पूंजण रो
- राखो हरदम साथ शरणो च्यारां रो,
- राग की बद चेतना को छोड़ दो।
- राग री रेंस पिछाणो
- राग-द्वेष का तोड़ा गिराता बाण है,
- राग—द्वेष
- राज बताओ
- राजपथ मत छोड़ साथी!
- राजर्षि प्रश्नचन्द्र
- राजस्थानी गीत
- राजहंस, सर को मत छोड़ो
- रामसुख रलियामणो
- रामायण
- रावण की पूजा
- राष्ट्रसंत को पुण्य प्रणाम
- राही से
- राही! प्रगति शिखर पर बढ़े चलो,
- रूं रुं में हर्ष न मावै है, म्हांरी सांस-२ मुस्कावै है,
- रूं रूं में सांवरियो रमग्यो, जबरो दीप जलायो हो
- रूं-रूं में सांवरियो बसियो
- रूं-रूं में सांवरियो बसियो, सांवरियो बसियो,
- रेंगती जिन्दगी
- रैन बसेरा
- रोको काया री चंचलता
- रोज की एक सलाह
- लक्ष्य हो आत्मा का उत्थान
- लक्ष्य, राह निहारता है
- लखकर दुनिया रो व्यवहार, म्हानै इचरज आवै जी,
- लगता सबको फूल मनोहर।
- लघु को देख न हंसना, बच्चों!।
- लघु साधु वंदना