गीतिका संग्रह — पृष्ठ 5
2856 में से 241–300
- अर्हत् वाणी के पथ पर चलकर, महावीर मुझे अब बनना है ।
- अर्हम्, अर्हम्, अर्हम्, अर्हम्
- अलख जगावां
- अलबेलो शासण थांरो – स्वर्गा सी है छटा निराली
- अवसर ही अवसर है
- अविरल गति से चलते जाएं, प्रभु के बतलाये वचनों पर,
- अश्रुपूरित नयन
- असल ठिकाना
- अस्थिर संसार
- अहा! अभिनव उच्छव छाए, तेरापंथान में।
- अहिंसा
- अहिंसा का वह गायक था
- अहिंसा की चेतना का जागरण हो विश्व में,
- अहिंसा गीत
- अहिंसा जीवन को बदले
- *अहिंसा भगवती की हम पूजा करें,
- अे गण देवता थांरै में करां वंदना,
- अै दो सूरज दो चांद साथ उदियाया।
- आ गई यह विदा की घड़ी, सबके दिल में उदासी है छायी,
- आ तो च्यार दिनां री च्यांदणी,
- आंकणो है संयम रो मोल
- आंख खोल करके,
- आँखों के सितारे मेरे सांवरिया,
- आंखों से कर परगुण दर्शन।
- आंख्यां रो तारो म्हारो लागै सगलां नै प्यारो
- आंगण आया भगवान, मन मोद न मावै है।
- आंगन में पावन तुलसी ज्यों
- आंधी और तूफानां में, रुक्या न जो व्यवधानां में,
- आंधी और तूफानां में, रुक्या न जो व्यवधानां में,
- आंधी क्यों तूं धूम मचाती?
- आंसू में क्या छिपी
- आई बहारें, आंगण हमारे, संघ सितारे, गुरुवर पधारे।
- आई माघ में दीवाली, घी के दीप जलाएंगे।
- आई रवि में नव अरुणाई, चेहरे चेहरे पर तरुणाई,
- आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो
- आए घर भदन्त हैं, राष्ट्रीय सन्त हैं।
- आएं चाहे सौ-सौ संकट
- आओ आओ ओ गुरुराज! तुम्हें ये प्राण बुलाते हैं।
- आओ आओ दिखाओ मूरतिया,
- आओ ए! सहेल्यां संग, गावां आज दीहाड़ो।
- आओ दीवाळी रा घट-घट दीप जळावां जी, जळावां जी।
- आओ नी सांवरिया जोवां बाट म्हैंऽऽऽऽ
- आओ प्रभुवर पारस
- आओ भगवन मेरे आंगन मेरी इच्छा साकार करो
- आओ युवकों आगे, कुछ कर दिखलानां है,
- आओ रे, मेरे प्रभु आओ रे,
- आओ स्वामीजी
- आओ स्वामीजी, थांनै झाला दे बुलावां
- आओ स्वामीजी!
- आओ हम एक साथ
- आओ हम जीना सीखें
- आओ हम सब आज करें तुलसी को वन्दन रे
- आओ-आओ भिक्षु स्वामी!
- आओ—आओ भिक्षु स्वामी !
- आओ, आओ धरती पर प्रभु आओ महावीर।
- *आओ, हम संकल्प करें जीवन को उच्च बनायेंगे,
- आखा तीज
- आखिर तो जाणो पड़सी – मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं
- आख्यां खोलो
- आगम में अंकित चक्री के, रत्न चतुर्दश भारी—पढ़े हैं।