गीतिका संग्रह — पृष्ठ 36
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- मिला दुर्लभ मनुज जीवन, इसे यों ही न खो देना।
- मिला है संघ ये पावन, मधुर पाया है अनुशासन।
- मिले तब जीवन में आनन्द
- मिल्यो अमोलक मिनख जमारो,
- मिल्यो मिनख अवतार, चेत तूं बावळा!
- मीठी वाणी
- मीठो सांवरिये रो नाम जाणै मिसरी री डळी
- 'मुंबई महानगर री झांकी'
- मुख पर हरदम मुस्कान रहे
- मुख पे नित गूंजे महावीर नाम,
- मुखड़े पर मुस्कान चाहिए
- मुझको मुझ तक ही रहने दो
- मुझे तो करना निज कल्याण।
- मुझे देव ! तुम बतादो, कैसे तुझे रिझाऊँ,
- मुझे नाथ! तेरी मुखछवि सदा भाती है, भाती है,
- मुणिन्द मोरा
- मुदिर! अरे! क्यों इठलाते हो?
- मुनि जीवन सदा जगाओ
- मुनि पंचक
- मुनि संयम राता
- मुनिवर मधुकर स्वाम गण में गौरव पाया जी।
- मुनिवर! तुम्हारी देख विदाई, आंखों में सबके आज रुलाई।
- मुर्गा बोल रहा कुकड़ूं कूं।
- मुस्काती मुद्रा अभिनंदन
- मुस्कान
- मूंघो मिनख जमार
- मूरख लखजा रे
- मूर्छा की ग्रंथि खुलेगी
- मृगापुत्र
- मृत्यु ही सत्य
- मृदु वाणी
- ४१, मेघ! केवल गरजते हो
- मेरा जीवन समर्पित
- मेरा मन स्थिर हो जाए, भटकने न पाए,
- मेरी आंखों में मूरत तुम्हारी प्रभो।।
- मेरी बीमारी
- मेरी भावना
- मेरे गुरुवर का शुभनाम, जग में जयकारी,
- मेरे तो संघ की महिमा सकल जहान में है,
- मेरे दिल की हर धड़कन में गूंजे गुरु की आवाज,
- मेरे दिल की हर धड़कन में गूंजे गुरु की आवाज,
- मेरे देव मैं नहीं चाहती
- मेरे नयनों में बसते सदा महावीर है,
- मेरे प्राण पियारे गुरु तुलसी, इस मन मंदिर में आओ तुम,
- मेरे मन के दीप! जलो रे
- मेरे मन मन्दिर के स्वामी, तेरी पद रज मिल जाये,
- मेरे मन मन्दिर में आओ, मेरी नैया पार लगाओ,
- मेरे मन मन्दिर में बिठाऊं
- मेरे मन! तूं तज भटकना मान ले कहना,
- मेरे सतिवर करो स्वीकृत
- मेला है ओ s s s, मेला हे ओ s s s
- मैं अगाया गीत गाऊं
- मैं तेरे गुण प्रभु कैसे गाऊं, तूं ही है आधार मेरा,
- मैं तो गुरुवर! तेरे गीत गाऊं,
- मैं तो पल-पल गाऊं रे
- मैं तो प्रभुवर रा गुण गाऊं रे
- मैं तो बचपन री बातां नै याद करूं,
- मैं महफिल से दूर तुम्हारी
- मैं शीश झुकाता हूँ, मुझे नाथ ! निहारो तुम,
- मैं ही अपना निर्माता