गीतिका संग्रह — पृष्ठ 37
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- मैं हूँ दीप, दिवाकर तुम हो
- मैत्री भाव जगाए जा, सबका मन सरसाए जा,
- मोरा माता के प्यारे, आदीश्वर जग
- मोह माया का फंदा
- मोहक सा मुस्काता मुखड़ा है ये तेरा
- मौत यदि याद दिलाए, तो तुझे याद आए,
- मौन की महत्ता
- मौन दिवस
- मौन पेड़ के पल्लव सारे
- मौन मंत्र है सघन तंत्र, इससे मानव पूजा जाता।
- मौन मेरी साधना चलती रही, चलती रहे।
- मौसम आज मन भावन, खुशी रो मेहलो बरसै
- मौसम सुहानी मन भाई,
- म्हांनै घणो सुहावै जी
- म्हांनै याद घणा आवै, तेरापंथ रा धणी,
- म्हांनै शिविर साधना, पल-पल मन भावै।
- म्हांरै गण रो प्रखर प्रकाश,
- म्हांरै गांव में, मोत्यां री देखो बिरखा आई सा।
- म्हांरै हिवडै रा मेहमान, गुरुवर आया आंगणै।
- म्हारा गुरुवर प्यारा! भक्ति भरी म्हारी, झेलो वन्दना,
- म्हारी आख्यां नै गुरु महाश्रमण री मूरत भावै रै, म्हारी आख्यां नै,
- म्हारी आख्यां में बस ज्याओ,
- म्हारी एस-सेलड़ियां
- म्हारी चेतना में प्रभु रो नाम है,
- म्हारी जीभडी नै प्यारो-प्यारो लागै तुलसी नाम,
- म्हारे आंगणिये
- *म्हारे गुरुवर रो बड़े भ्रात सहसा सुरग सिधायो रे,
- म्हारै अंतर में ज्योति
- म्हारै आंगण लागी रंगरली, मुख-मुख में मीठी मिसरी डली,
- म्हारै आंगणै पधारो
- म्हारै मन-मन्दिर में प्रभु महावीर है
- म्हारै मनड़े रो भय भाग्यो है,
- म्हारै श्रद्धा रा आधार जी,
- म्हारै संघ में मर्यादा ही है जीवन आधार,
- म्हारै सांस-सांस में बोलै
- म्हारै हियड़े बसै जी, म्हारे हियड़े बसे,
- म्हारै हिरदै में बसै तुलसी प्रभु रो नाम
- म्हारै हिवड़ै रा हार, बसग्या सुरगा मझार
- म्हारो अभिवादन स्वीकारो
- म्हारो मन पारस प्रभु रै चरणां में लाग्यो,
- म्हारो रोम रोम हरसावै
- यदि अपना इतिहास पढ़ो तो
- यह गण समुद्र कहलाए।
- यह जग सपनों की है माया
- यह जिन्दगी है उपहार, खो नहीं जाए,
- यह जीवन एक कहानी है
- यह जीवन रैन बसेरा है,
- यह जैनी जीवन शैली, जो भी अपनाता है।
- यह तन मिट्टी का
- यह तेरापंथ महान
- यह दुनिया एक अजब माया
- यह भारतभूमि हमारी है
- यह मानव जीवन, सबसे पावन,
- यह वसुधा ही जिसका घर है, वह महामानव कहलाता है,
- यह विश्व विचित्र अरे! कैसा?
- यह संघ हमारा प्राणकोश
- यह संघ हमारा है
- यह सबलों का संसार है
- यह हमारा महा पर्व संवत्सरी।
- यह है जगने की