गीतिका संग्रह — पृष्ठ 20
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- तप है मंगलकारी जी
- तपःपूत चरणों में वन्दन
- तपसण! थांरे जीवन री उजली भोर है
- तपसी संतां री जावां हां बलिहारी,
- तपस्या
- तपस्या करणै स्यूं आ काया, कंचन सी बण ज्यावै है।
- तपस्या करल्यो रे
- तपस्या जीवन रो श्रृंगार
- तपस्या निराली रे
- तपस्या री गंगा
- तपस्या री प्रेरणा
- तपस्या री महिमा देखो अपरंपार
- तपस्या रो बादळियो
- तपस्या रो हेलो
- तपस्या से होता शोधन।
- तपो तुम सहस्रांशु समान
- तम भरी जिन्दगी की राहों में,
- तमाशा लग रहा मुझको जगत मानो मदारी का,
- तलाश
- ताकत दी है
- तास रा पत्ता
- तिलक गुरुराज करयो
- तीन चित्र
- तीन बोलां करी
- तीन भाव
- तीन मनोरथ
- तीन रुपक
- तीन लोक के नाथ महाश्रमण अब तारो ना
- तीर्थ
- तीर्थंकर स्तुति
- तीर्थंकर स्तुति
- तुम अंतर्यामी हो
- तुम अन्तर का दीप जलाओ
- तुम क्या हो?
- तुम ज्योति बांटने आए हो..........
- तुम ज्योति-पुंज-बन आए।
- तुम मेरे हो जिगर
- तुम हमारे, हम तुम्हारे
- तुम हो चिन्मय
- तुम हो पावन
- तुम हो महाप्राण
- तुमने अपने नयन न खोले
- तुमसे लागी लगन
- तुम्हीं बताओ भेंट करें क्या
- तुम्हे शीश झुकाते हैं नाथ! हम तुमको मनाते हैं,
- तुम्हें वन्दन करता हूँ, भक्ति रस से भरा,
- तुलसी का नाम सुहाए, तुलसी से लय जुड़ जाएं।
- तुलसी की कृति हो तुम
- तुलसी की देन
- तुलसी के अवदानों का, अब कैसे मूल्य चुकाएं।
- तुलसी गुरु के चरणों में शत नमन हमारा है
- तुलसी जन्मोत्सव
- तुलसी जय तुलसी जय तुलसी जय
- तुलसी तुम्हारा नाम हम दिल में सदा बसाएं
- तुलसी तुलसी जय बोलो।
- तुलसी तुलसी नाम ललाम।
- तुलसी तुलसी भजले तूं
- तुलसी तुलसी समरल्यो तुलसी हिवड़े री कोर
- तुलसी तूं जन जन का प्यारा, चमक रहा बनकर ध्रुवतारा,
- तुलसी तेरापंथ रो ध्रुवतारो – तुलसी तेरापंथ रै, आकाश रो ध्रुवतारो