गीतिका संग्रह — पृष्ठ 11
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- कियां चुकावा गुरु रो ऋण
- किरपण दीन अनाथ ए
- किस नशे में मानव! है तू सो रहा,
- कुछ भी नहीं असंभव साथी
- कुछ व्यक्ति छोड़ जाते हैं ।
- कुछ शक्ति जगाओ
- कुछ सोच अरे
- कुछ सोच, अरे राही !
- कुटिल, काला नाग
- कुल नै उजाल्यो म्हांरो लालजी।
- कृतकृत्य नयन
- कृतज्ञता
- केवल देखें
- केसा उपचार
- कैसी वह कोमल काया रे
- कैसी है पहचान तुम्हारी
- कैसी है यह दुनिया मैं तो समझ नहीं पाया,
- कैसे आएंगे भगवान ?
- कैसे आत्मा में साधना का रंग आए?
- कैसे उसे भुलाएं?
- कैसे दूं उसका परिचय?
- कैसे ध्यान लगाओगे
- कैसे बतादो भगवन्! तेरी आरती सजाऊं,
- कैसे भजूं
- कैसे भुलायें
- कैसे मैं तुम्हें मनाऊं
- कोई न किसी का साथी है
- कोई न पूछे निर्धन को
- कोई बैठा प्यासा
- कोई सुखी है
- कोई से हो जाए खटपट।
- कोटि-कोटि कण्ठों से गाएं जिनके गीत सुरुम्य रे।
- कोहिनूर गण नै सुंप्या, गुरुवर तुलसी हो।
- कौआ काला कोयल काली।
- कौन अभागा
- कौन किसका है अरे! सब स्वार्थ का व्यापार
- कौन प्रज्ञा द्वार सोले
- कौन सुनता है
- क्या कहता हS जैन वाङ्मय
- क्या जाने जीवन
- क्या बनना है बोलो पढ़कर
- क्या भरोसा इस पवन का?
- क्या भूलें ? क्या याद करें ?
- क्या मंद भाग्य का रोना है
- क्यांरो करै रे गर्व बावला,
- क्यूं भरमावे रे मनुज! तूं,
- क्यों
- क्यों करते केवल पर दर्शन
- क्यों भूल रहा पगले! एक दिन तो जाना है।
- क्रूर काल
- क्रोध
- क्रोध कदेय नहिं कीजिए
- क्षण भंगुर दुनिया
- क्षण-क्षण का उल्लास जिन्दगी
- क्षमा करो मन खतं स्यूं
- क्षमा का पर्व
- क्षमा का पर्व
- क्षमा दिवस
- क्षमा-धर्म की विजय-पताका,
- क्षमायाचना दिवस