गीतिका संग्रह — पृष्ठ 27
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- पाछा भेजोनी
- पाट सके हम कैसे अन्तर
- पादप! धैर्य तुम्हारा
- पानी बहता ही निर्मल है
- पापमती ठाकुर
- पापी मानस काला काला
- पायो अवसर म्हैं पावन।
- पार हो जाएगा रे, कर आत्म-धर्म से प्रीत,
- पारस पारस री लगाऊं धुन घड़ी घड़ी,
- पारस प्यारा प्रभुवर मन बसिया,
- पारस प्रभु तारो
- पारस प्रभु री म्हैं तो
- पारस प्रभु रो नाम, निसदिन में ध्याऊं जी, मैं ध्याऊं।
- पारस प्रभुवर! थांरै चरणां में म्हे शीश झुकावां हां,
- पार्श्व नाम मंगलकारी,
- पिंजरे का पंछी
- पिंड में ब्रह्मांड
- पिपासा की मांग
- पिया जिसे पीयूष मान कर
- पीते जो शराब करते हैं बर्बादी,
- पीर हरो महावीर
- पुरुषो, अपनी हार न मानो
- पूज्यवर महाप्रज्ञ भगवान।
- पूनम का शशि, ज्यों स्वच्छ शीतल।
- पूरब में छाई है लाली
- पूर्ण को उपहार कैसा?
- पैसा ठन ठनाठन ठन न न न न न बोले रे,
- पौरुष
- पौरुष की गाथा
- प्यार का पथ क्यों छोड़ दिया
- प्यारा तेरापंथ, इसकी जग में शान बढ़ायेंगे,
- प्यारा नयन सितारा
- प्यारे बच्चो, करो न क्रोध
- प्यारे बच्चो, सीखो ज्ञान
- प्यारे बच्चो! प्यारे बच्चो! प्यारे बच्चो! सुन लो सभी,
- प्यारे बच्चों, बनो विनीत
- प्यारै प्रभु रा दरशण करणै मन म्हारो उमगावै है,
- प्यारो उणिहारो, देख ओ थांरो, हिवड़ो ठर्यों है म्हांरो आज।
- प्यारो प्यारो पारस नाम, जग उजियारो पारस नाम,
- प्यारो प्यारो, ओ थांरो उणिहारो,
- प्यारो प्यारों तुलसी
- प्यारो लागै सांवरियै रो नाम,
- प्यारो सांवरियै रो नाम आवै संकट में जो काम
- प्रकृति
- प्रकृति नया जीवन पाएगी
- प्रगति पंथ पर युवको! बढ़ते जाओ, लेकर साहस का सबल,
- प्रगति प्रतीक्षा करती
- प्रज्ञा के अवतार परम गुरु महाप्रज्ञ को नमन हमारा,
- प्रज्ञा के दीप जलेंगे, मन के संकल्प फलेंगे,
- ५५, प्रज्ञा जगे
- प्रज्ञा दीप जला ले
- प्रज्ञा सागर की लहरें
- प्रज्ञा-अवतार ! शासन शेखर! लो शत-शत वन्दन।
- प्रज्ञापर्व : अमर अवदान
- प्रणति-गीत
- प्रतिपल ध्यान लगाये
- प्रबन्धन
- प्रभु आदिश्वर करुणा सागर तुम जग के अखिलेश
- प्रभु का जाप
- प्रभु का नाम, प्रभु का नाम, भज ले मन तुं प्रभु का नाम,