गीतिका संग्रह — पृष्ठ 28
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- प्रभु का सुमिरन जो नित करता।
- ९, प्रभु के द्वार
- प्रभु जी! सरणै करो नी म्हारी साधना, साधना,
- प्रभु तुलसी तुम्हें है नमन, ये कैसा खिलाया चमन,
- प्रभु तुलसी ने दिखलाए पथ, गण के विकास के।
- प्रभु दो वरदान
- प्रभु ने जो दीप जलाया, हम प्रतिपल स्नेह पिलाएं।
- प्रभु ने भजल्यो रे।
- प्रभु पार्श्व देव चरणों में
- प्रभु पार्श्वनाथ भगवान
- प्रभु भगति में रंग जाना,
- प्रभु मन मन्दिर में आओ
- प्रभु! यह तेरापंथ सुप्यारा।
- प्रभुजी स्वीकारो रे, म्हारी भावता रे,
- प्रभुवर का जप कर लो।
- प्रभुवर भिक्षु स्वामी का शासन सबल सहारा है।
- प्रभू! म्हारै मन-मंदिर में पधारो
- प्रभो! क्यों हो गए ओझल,
- प्रभो! तुम्हारे आदर्शों पर चलता जाए जग सारा
- प्रभो! तुम्हारे पावन पथ पर
- प्रभो! यह तेरापंथ महान
- प्रभो! यह पावन तेरापंथ।
- प्रहसम परम पुरुष नै समरू
- प्राणी! कर्म समो नहीं कोई
- प्राणी! समकित किणविध आई रे
- प्राणों से प्यारा तेरापंथ
- प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन
- प्रातः उठकर ध्यान धरूं मैं विमल भावना भाऊं हो
- प्रातः स्मरणीय
- प्राप्त कर विज्ञान आत्मन्! अज्ञता का तम हरो,
- प्राप्त कर संघीय जीवन, संघ सीमा में चलें।
- प्रायश्चित्त गीत
- प्रीत प्रभु से कर लो
- ५० प्रेक्षा ध्यान
- प्रेक्षाध्यान गीत
- प्रेक्षाध्यान री पावन गंगा में डुबकी लगा,
- प्रेम स्यूं सब बोलो, रायऋषि जयकार।
- प्रेरणा गीत
- फड़कती भुजाएं
- फरिश्ता अमन का
- फलता रहे गण यह महान्, मिलता रहे धरती को त्राण
- फूला फूला फिर रहा
- फूलों में गन्ध ज्यों सरराये
- फेरो मन का चकरिया
- फैला चारों और प्रदूषण
- बंधन
- बंधन और मुक्ति
- बचपन को ऐसे जीयें हम।
- बचपन लगता है मनभावन।
- बच्चे हों संस्कारी।
- बच्चे! चाहे शक्ति बढ़ाओ।
- बच्चो, कभी न करो प्रमाद ।।
- बच्चो, तुम गुणवान बनो
- बच्चो, दो संगत पर ध्यान
- बच्चो! प्रतिपल बढ़ते जाना,
- बच्चों का जीवन निर्मल है
- बच्चों की जीवन फुलवारी
- बच्चों, है यह भारत देश
- बच्चों! नकल कभी मत करना।
- बच्चों! प्रण करलो निज मन में,