गीतिका संग्रह — पृष्ठ 29
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- बच्चों! सीखो करना संयम,
- बजी झणणण थाली, क छाई खुशहाली
- बड़ा चमत्कारी
- बड़ा दु:ख
- बड़ी साधुवंदना
- बढ़ चलो, बन्धुओ! मंजिल पर
- बढ़ते जाना तूं हर पल, खुद चल आयेगी मंजिल,
- बढ़ते जायेंगे कदम, इस दिन दूर हटेगा तम,
- बढ़े विश्व में भाईचारा
- बढ़ो राही, बढ़ो राही,
- बदलता रहता सभी कुछ
- बदलाव न आया
- बदले जीवन घारा
- बन प्रमत्त क्यों सुस्ती लाते
- बन विनीत रहना जीवन में।
- बने जैनों की नव पहचान,
- बन्दे तजदे फंदे आखिर परभव में जाना
- बरसाना अमृत की
- बलिदान कठिन है
- बलिदानों की कहानी
- बलिहारी सांवरिया
- बस, बढ़े चलो मंजिल की ओर
- बसता निर्माण विनाशों में
- बसा है नाम तुलसीराम, श्वास हर एक धड़कन में।
- बह रहा, बह रहा, बह रहा रे,
- बह रहा, बह रहा, बह रहा रे, समय पवन ज्यों बह रहा रे,
- बहती यह जिन्दगी रूक न जाए,
- बहनों अब आगे आओ, अपना पुरुषार्थ जगाओ।
- बहिनों। अब आगे आओ,
- बांध सको तो बांधो
- बाजार
- बादल बरसे उमड़ घुमड़कर।
- बादळियो आंखड़ल्यां में
- बाधा हरल्यो
- बाधाएं
- बाबा ऋषभ एकला,
- बाबा भिक्षुस्वामी की शुभ स्तवना करते हैं।
- बाबे के गुण गाएंगे, भिक्षु को बुलाएंगे,
- बाबे रे नाम रो साचो सहारो रे,
- बाबै ने मनावां
- बाबै भिखण जी रो नाम जपूँ भोर—भोर में,
- बाबै भिखण रे चरणां में नित उठ शीश झुकावां,
- बाबै भिखण रै गण आज, छायी देखो रंगरलियां,
- बाबै मीखण की जग में, महिमा है भारी,
- बाबै रो नाम म्हांनै प्यारो-प्यारो लागै रे,
- बाबै रो प्यारो नाम, बाबो श्रद्धा रो धाम,
- बाबै रो शरणो बड़ो, भक्तां रो आधार है,
- बाबै रो, नाम बड़ो है प्यारो ओ,
- बाबो उपकारी, जावां बलिहारी,
- बार बार अनुचित चित है खाना।
- बारहवां व्रत
- बाल शिविर गीत
- बाल संस्कार
- बालू नंदन ने वंदन सौ-सौ बार
- बावला! क्यूं तूं राच्यो है मायाजाल में,
- बावलो बण्यो है क्यूं तूं इण तन धन में,
- बाहुबली भैया से बहिनें पुकारे,
- बिखरी है आशा ही आशा
- बिदाई
- बिना श्रम के जिन्दगी में, सफलता मिल नहीं सकती,