गीतिका संग्रह — पृष्ठ 30
2856 में से 1741–1800
- बीच भंवर में नैया
- बीत रही एक-एक लाखीणी घड़ी,
- बीती जाए रे, उमरियां बीती जाए रे,
- बीतै बीतै बीतै यूं ही उमर थांरी बीतै रे,
- बीत्यो इम पखवाड़ो जावै
- बीस विहरमाण
- बोते जाओ जीवन में
- बोलो ऋषभ देव, बाबै री, सगला जय बोलो।
- बोलो जय वीरा, जय-जय महावीरा,
- बोलो बच्चो, मीठे बोल
- बोलो महाश्रमण नै खम्मा धणी,
- बोलो हिलमिल जय
- बोलो-बोलो गुरु की जय बोलो,
- बोवे सो काटे
- भक्ति की महत्ता
- भक्ति दा रंग
- भक्तों के भगवान् भिक्षु लो वन्दना मेरी,
- भगवन् ! मन मंदिर में आओ,
- भगवन्! मुझे बता दो इतना कि तुम किधर हो,
- भगवन्! हम चल आये तेरे द्वार पे,
- भगवन्! हम चल आये तेरे द्वार पे,
- भगवन्! हृदय की अर्ज सुनाओ,
- भगवान ॠषभदेव
- भगवान महावीर
- भगवान महावीर के प्रति
- भज मन भिखू-स्याम
- भज ले प्रभु का नाम, काम बन जाये,
- भज ले रे मनवा! भिक्षु-भिक्षु, भव सागर तर जाएगा।
- भजन कर प्यारे मिलेगा शिव धाम,
- भजन करो भगवान रो
- भजिए निशदिन कालु गणिन्द
- भजिये भविजन! भिक्षुगणी गणनायक तेरापंथ-धणी।
- भजो भवि! भिक्षुगणी,
- भटक रहा कब से तूं इन्सान,
- भटकन में युग बीते
- भटके हुए लोगों को सही बताओ,
- भलो थे अनशन ठायो रे!
- भव से पार
- भवि! तुम चेतो रे
- भस्म हुई अगणित कन्याएं
- भादूड़ी तेरस नै आज, सुरग सिधाया हा गणताज,
- भाया! मौके पर इं जीभलड़ी ने वश में राखज्यो,
- भारत के लोगो! जागो तुम जीवन में संयम अपनाओ।
- भारत के सेनानी,
- भारत भू पर दिव्य ज्योति ले चमका बन ध्रुवतारा था,
- भारी अनशन धारयो जी क, भारी अनशन धारयो जी।
- भारीमाल गणी
- भारीमालजी स्वामी री म्है जावां बलिहारी,
- भाव तपस्या
- भाव बढ़ावण आया, साता पूछण आया
- भाव श्रावक की चर्या धारो
- भाव-सरिता
- भावना भाऊं प्रातः शाम,
- भावना यही सदा, मैं करूं सबका भला,
- भावना, यह मेरी, मैं बढूं सत्य राह पर,
- भावों की गर्मी
- भावों की सांकल
- *भावों पर टिकी हुई है, हर मानव की जिन्दगानी,
- भाषा एक राष्ट्र की हिन्दी
- भाषा शमिती सिखावै रे