गीतिका संग्रह — पृष्ठ 31
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- भिक्खू नाम री मैं माला फेरूं भोर—भोर में,
- भिक्षु का नाम प्यारा, विश्व का है उजारा,
- भिक्षु का नाम-निराला
- भिक्षु का सहारा
- भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे
- भिक्षु की आज गाएं, मंगलमयी ऋचाएं।
- भिक्षु की गौरवमयी गाथा सदा गायें,
- भिक्षु के चरणों में हम सब वन्दन बारंबार करें
- भिक्षु के दर्शान
- भिक्षु के प्रताप से
- भिक्षु को आंगण में
- भिक्षु को वन्दन बारम्बार ।
- भिक्षु को सांसों में बसा लो
- भिक्षु गुण-स्तवन
- भिक्षु चरमोत्सव
- भिक्षु जीवन गाथा
- १०, भिक्षु तेरा आसरा
- भिक्षु नाम की विजय पताका हम जग में फहरायेंगे,
- भिक्षु नाम चमत्कारी।
- भिक्षु बाबा का स्तवन शुभ भावना से सब करें हम।
- भिक्षु बाबा! लो हमारी वन्दना
- भिक्षु भिक्षु नाम स्यूं, लागी म्हांरी प्रीत।
- भिक्षु भिक्षु बोलो, सब नर नार,
- भिक्षु भिक्षु भजन हो, तन से, मन से और वचन से
- भिक्षु भिक्षु सब गाएं
- भिक्षु भिक्षु ही जबां पर नाम है
- भिक्षु मेरे दिल के राम
- भिक्षु म्हारै प्रगट्या जी
- भिक्षु म्हारै मन रम्या जी, भिक्षु रो आधार ।
- भिक्षु शासन की महिमा हम गाएंगे
- भिक्षु स्तुति
- भिक्षु स्वाम ज्योतिर्धाम पावन नाम
- भिक्षु स्वाम, मिक्षु स्वाम,
- भिक्षु स्वामी की संपदा
- भिक्षु स्वामी जी जगत में नामी जी
- भिक्षु स्वामी! अन्तर्यामी!
- भिक्षु है इमरत रो झरणो
- भिक्षु-भिक्षु जपतां टूटै करमां रा बन्ध,
- भिक्षु-भिक्षु बोल तूं
- भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारे
- भिक्षुक का अभिनन्दन क्या ?
- भिक्षुगण अनुशास्ता रायचन्द गुरुराज!
- भिक्षुशासन का उज्ज्वल इतिहास,
- भिक्षुस्वामी अंतर्यामी
- भिक्षुस्वामी रो सुहाणो
- भिक्षुस्वामीजी ! शरण तुम्हारी आया।
- भिक्षू गुरु! तारो, तारो तारो तारो।
- भिक्षू जशधारी,
- भिक्षो! शासन आपरो, चाढ्यो शिखरां आज,
- भिखण जी रो शासन लागै है प्यारो,
- भिखण रा गुण गावां, स्वाम री मूरत ध्यावां,
- भीखण जी स्वामी भारी मर्यादा बांधी
- भीखण बाबा की
- भीखण री मूरत भावै, जपतां मनड़ो हरसावै
- भीखण री श्रद्धा
- भीखणजी स्वामी रे चरणां वंदना बारम्बार है।
- भीगी हुई मन दीप की बाती, लौ अब जलादो भगवान रे,
- भीतर का बन्धन टूटेगा मेरा,
- भुलावा
- भूल नहीं राष्ट्र का गौरव।