गीतिका संग्रह — पृष्ठ 26
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- नेमां का नन्द दुलारा, सबको लगता प्यारा,
- नेमां मां के नन्दन, करते तुमको वन्दन,
- नेमां रो दुलारो, म्हारै मन में बसै,
- नेमानन्दन, गण के भूषण, वरदान तुम्हारा है साया,
- नैनों में समाये, प्रभु ही सुहाये,
- नैया अपनी भव से तू पार लगा ले,
- नैया पार लगा जाओ
- नैय्या पार
- नौजवानों जाग जाओ, देश के आधार हो तुम।
- न्याय मार्ग के साथ रहो तुम।
- पंखीड़ा ओ पंखीड़ा
- पक्षियों में मोर सुन्दर
- पग-पग मंगलाचार
- पट्टोत्सव
- पतझड़ के सूखे कानन में
- पतवार
- पथ का गीत
- पथदर्शक गुरुराज तुलसी प्रभुवर प्याराजी।
- पदचाप
- पदचिह्न
- पद्मावती आराधना
- पधारे धरती पर भगवान
- पधारो श्री तुलसी गुरुराज।
- पधार्या स्वर्गां में
- पर उपकार भूल मत जाना।
- पर भावों की ममता, अब छोड़ अरे चेतन
- पर भावों की ममता, अब छोड़ अरे चेतन,
- पर सुख देख न जलना भाई।
- पर हित क्या करते हो बोलो।
- परम को प्रणाम
- परम पूज्य गुरु महाश्रमण को जग यह शीश झुकाता है,
- परम से प्रीत तूं कर ले, मुक्ति का द्वार खुल जाये,
- परमेष्ठी पंचक ध्याऊं मैं सुमर सुमर सुख पाऊं
- परमेष्ठी वंदना
- परमेष्ठी स्तुति
- परमेष्ठी स्तुति
- परवशता
- परिवर्तन का खेल
- परिष्कार
- परिस्थिति
- पर्दे पीछे छलना
- पर्यावरण प्रदूषण से जग को बचायें हम,
- पर्युषण
- पर्युषण पर्व
- पर्युषण मनावां
- पर्व पजूषण
- पर्व पजूषण
- पर्व पजूसण आयो,
- पल पल जपूं सांवरे
- पल पल बीती जाय
- पल पल सफल बणालै तूं भाई
- पल पल सफल बणालै तूं, भाई
- पल-पल लाभ उठाओ
- पल-पल है सामने – कहता है कौन यहां तुलसी नहीं है
- पलक पलक तोरी बीतै उमरिया,
- पहरुओं से
- पहली तोलो रे
- पहले अपना घर संभालो
- पा ली-पाली की पावन धरा,
- पांचू परमेष्ठी प्यारा