गीतिका संग्रह — पृष्ठ 42
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- संकल्प हमारा साथी है,
- संगठन का दिव्य दीवट, दीप जीवन का जलाऊं।
- संघ -सुषमा विकसाएं हम।
- संघ अपना अब बने, साकार सत्य प्रयोगशाला।
- संघ उपवन में निहारो आयो नयो बसन्त
- संघ का गौरव गाएं हम
- संघ की जरूरत है
- संघ की नीवें गहराएं।
- संघ की शान बढाएं हम
- संघ के उन्नायक महाप्रज्ञ गुरुराज।
- संघ गीत
- संघ गीत
- संघ जब उदास था1
- संघ भक्ति
- संघ समन्दर
- संघ हिमालय के शिखरों पर
- संत चरण गंगा की धारा,
- संत भीखणजी रो समरण
- संतां री वाणी, सुणल्यो लगाकर ध्यान,
- संतां। शासण ओ स्वामीजी रो,
- संतों का कैसा स्वागत ?
- संतों की संगति
- संथारा
- संथारो साचे मन धारयो,
- संभल-संभल चल हर पल मनवा,
- संभळकर चालजै रे, है टेढ़ो जग व्यवहार,
- संभालो अपने आपको, तो। व्यवहार,
- संयम का सन्देश महोत्सव
- *संयम जीवन में लायें, स्वस्थ नागरिक कहलायें,
- संयम शासन का श्रृंगार
- संयम ही जीवन
- संयम है जीवन रो अमरित,
- संयम: खलु जीवनम्
- संयम: खलु जीवनम्
- संवत्सरी दिवस
- संवाद भगवान से
- संविधान : अनुशासन की पहचान
- संसद की गरिमा पहचाने।
- संस्कार
- संस्कार बदलो सफल बनो
- संस्कारी बनो
- सकल जगत् में कहीं न मुझको सच्चा प्यार मिला ।
- सक्षम है
- सचमुच में भगवान हो
- सचमुच साथी! दीप जला है
- सच्चा इन्सान
- सच्चाई को लगती फांसी
- सच्ची धार्मिकता
- सच्ची मींत
- सच्ची सीख
- सजग चलो तो राह बहुत है
- सजग बनो
- सजग रहो अपने जीवन में।
- सजग हो आत्मानुशासन को जगाएं हम।
- सतत मेरे धर्म
- सतत विकासी श्रमण-संघ-संस्कृति का एक उदय हो।
- सतिवर के चरणों में
- सतिवर क्यों तुम जाते
- सतिवर जाते कहां
- सती राजीमती