ल से गीतिकाएँ
20 रचनाएँ
- लक्ष्य हो आत्मा का उत्थान
- लक्ष्य, राह निहारता है
- लखकर दुनिया रो व्यवहार, म्हानै इचरज आवै जी,
- लघु को देख न हंसना, बच्चों!।
- लघु साधु वंदना
- लाखां आंखडल्या माहि, प्रभुवर थांरी तस्वीर।
- लाग रह्यो चौमास
- लागै प्राणां स्यूं प्यारो
- लाडणूं रो हीरो
- लाडनूं रो हीरो
- लीला कर्मों की अलबेली
- ले नये निर्माण का व्रत आज अभिनंदन करें।
- लेवे मनड़ै नै जो तू समझाय,
- लो कालजयी व्यक्तित्व हमारा वंदन।
- लो जैन जगत के तीर्थंकर! मेरा प्रणाम लो
- लो दयानिधे ! चरण शरण में, द्वार तुम्हारे भक्त खडा़ है ।
- लो लाखों अभिनन्दन आत्म-विजय का दो वरदान।
- लो वंदन अभिवंदनाएं-अभिवंदनाएं।
- लोभ
- लौट के लौट के आयेगा ना गुज़रा समां